समय से डेंगू की पहचान और इलाज की प्रवृत्ति से जानलेवा नहीं बन पाता है डेंगू



कानपुर नगर - एक निजी स्कूल में शारीरिक अभ्यास के शिक्षक कौस्तुभ सेंगर (38) डेंगू प्रोटोकॉल का पालने ना करने की सजा झेल चुके हैं। वह बताते हैं कि उन्हें पांच सितम्बर 2023 को बुखार, सिरदर्द और बदन दर्द की समस्या हुई। उन्होंने पंद्रह दिन तक मेडिकल स्टोर से दवा खरीद कर खाई और शारीरिक गतिविधियां भी जारी रखीं। नतीजा यह हुआ कि उनकी हालत काफी खराब हो गयी। अस्पताल ले जाने पर जांच में पता चला कि प्लेटलेट 40000 तक पहुंच गया है और उन्हें डेंगू है। उनके एक परिचित चिकत्सिक ने सलाह दी कि अगर दवा लेते हुए घर पर आराम करें और तरल भोजन का सेवन करें तो प्लेटलेट रिकवर हो जाएगा और तबीयत भी ठीक हो जाएगी। कौस्तुभ बताते हैं कि लक्षण दिखते ही डेंगू की तुरंत जांच व इलाज होना चाहिए । वह खतरे की जद से बाहर आ गये लेकिन जरूरी नहीं कि सभी के साथ ऐसा हो ।

कल्याणपुर के बिनौर गाँव की रहने वाली किरण सचान (39) की नौ वर्षीय बेटी मथुरा के फैमिली टूर से सितम्बर में लौटी तो घर आने के बाद ही उल्टी और बुखार आने लगा। किरण बताती हैं कि एक निजी चिकत्सिक से दवा चलाया, लेकिन कोई आराम नहीं मिला। फिर किसी रिश्तेदार के कहने पर झाड़फूंक करवाया पर जब स्थिति बिगड़ी तो जिला अस्पताल ले जाकर दिखाया और बच्ची को भर्ती करवा दिया। वहां अच्छी सुविधाएं मिलीं और बच्ची ठीक होकर घर लौट आई । उनका कहना है की किसी भी बुखार में लापरवाही भारी पड़ सकती है इसलिये जितना जल्दो हो सके चिकित्सकीय परामर्श लेकर इलाज शुरू करना चाहिये।

सही समय पर इलाज जरुरी : जिला पुरुष अस्पताल उर्सला के चिकित्सक एमडी मेडिसिन डॉ. गौतम जैन बताते हैं कि डेंगू का तेजी से प्रसार होना गंभीर समस्या है। मच्छर जनित वायरस से प्रसारित होने वाले इस रोग के लक्षणों में बुखार, जोड़ों में दर्द, चक्कर आना, उल्टी आदि की समस्याएं हो सकती हैं। गंभीर मामलों में डेंगू से मौत भी हो सकती है।  इसके लक्षणों को पहचान कर अगर शीघ्र इलाज करा लिया जाए तो सामान्यतया न तो अस्पताल में भर्ती कराने की आवश्यकता पड़ती है और नही प्लेटलेट्स चढ़ाने की। इसके इलाज में दवा  के साथ साथ घर में उपलब्ध तरल खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए।

एडीज प्रजाति के मच्छरों से होता है प्रसार : अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी व नोडल डॉ आरपी मिश्रा का कहना है कि डेंगू मरीज की पहचान न होने और समय से इलाज न होने पर खतरा ज्यादा बढ़ जाता है। लोगों को भी चाहिए कि अगर डेंगू का लक्षण दिखे तो तुरंत सरकारी अस्पताल में जाकर निःशुल्क जांच कराएं और इलाज शुरू करवा दें । पूरे बाजू के कपड़े पहनने, मच्छर अगरबत्ती व मच्छरदानी का प्रयोग करने, कहीं भी साफ पानी का ठहराव न होने देने, साफ पानी के ठहराव वाले घरेलू व सामुदायिक स्थानों की नियमित सफाई करने और लक्षण दिखने पर तुरंत अस्पताल जाने जैसे पांच मत्रों को अगर लोग अपना लें तो डेंगू का प्रसार रुक जाएगा ।

सर्विलांस और सतर्कता के कारण इस वर्ष अब तक सिर्फ 4 मामले : जिला मलेरिया अधिकारी अरुण कुमार सिंह का कहना है कि जिले में बीते वर्षों की तुलना में इस वर्ष डेंगू के ज्यादा मामले नहीं आये हैं। जनवरी 2024 से अभी तक डेंगू के सिर्फ चार ही केस रिपोर्ट हुए है। यह विभाग की सर्विलांस टीम की आक्रामक गतिविधि का परिणाम है। जिले के जागरूक लोग आजकल बुखार होने पर अस्पताल जा रहे हैं, जांच करवा रहे हैं और मामले सामने आ रहे हैं। यह एक बेस्ट प्रैक्टिस है। डेंगू की समय से पहचान और इलाज होने से यह जानलेवा भी साबित नहीं हो पा रहा है। ऐसे में बिना घबराए सभी को मिलजुल कर डेंगू पर वार करना है।

जिला मलेरिया अधिकारी ने बताया कि राष्ट्रीय डेंगू दिवस पर गुरूवार को सभी ब्लॉक क्षेत्रों में जागरूकता संबंधी गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा।

वर्ष 2016 से प्रति वर्ष मनाया जा रहा 'राष्ट्रीय डेंगू दिवस' : मानसून की शुरुआत से पहले निवारक उपायों को तैयार करने के लिए वर्ष 2016 से हर साल 16 मई को 'राष्ट्रीय डेंगू दिवस' मनाया जाता है। इस वर्ष राष्ट्रीय डेंगू दिवस की थीम है "समुदाय से जुड़ें, डेंगू को नियंत्रित करें।" हर साल राज्य के अधिकांश जिलों से डेंगू के मामले सामने आते हैं, हालांकि, राष्ट्रीय दिशानिर्देशों के अनुसार बेहतर केस प्रबंधन के कारण राज्य में डेंगू के मामले में मृत्यु दर 0.1% से काफी कम है।