US दबाव में झुकी सरकार? राहुल गांधी का आरोप- महंगे हो सकते हैं UPI Payments

नई दिल्ली। लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि हालिया नोटिफिकेशन के जरिए ₹2,000 से अधिक के UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर भविष्य में मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने का रास्ता साफ किया गया है। उन्होंने आशंका जताई कि इसका असर आगे चलकर डिजिटल पेमेंट की लागत पर पड़ सकता है।

UPI चार्ज को लेकर सरकार के हालिया नोटिफिकेशन पर प्रतिक्रिया देते हुए राहुल गांधी ने दावा किया कि ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन पर MDR लगाया जा सकता है। उनके मुताबिक, ऐसे लेनदेन संख्या के लिहाज से भले ही कुल ट्रांजैक्शन का छोटा हिस्सा हों, लेकिन UPI की कुल ट्रांजैक्शन वैल्यू में इनकी हिस्सेदारी काफी बड़ी है।

हालांकि, सरकार ने अभी तक MDR की कोई दर घोषित नहीं की है और न ही ₹2,000 से अधिक के UPI ट्रांजैक्शन पर कोई शुल्क लगाया गया है। वित्त मंत्रालय के 14 सितंबर के नोटिफिकेशन में स्पष्ट किया गया है कि बैंक और पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर ₹2,000 तक के UPI ट्रांजैक्शन या RuPay-पावर्ड डेबिट कार्ड से किए गए भुगतान पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई शुल्क नहीं लगा सकते।

₹2,000 से ज्यादा के भुगतान पर क्या बदला?

नए फ्रेमवर्क के तहत सरकार उन इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट माध्यमों या ट्रांजैक्शन को अधिसूचित कर सकती है, जिन पर शुल्क नहीं लगाया जाएगा। मौजूदा नोटिफिकेशन में ₹2,000 तक के UPI ट्रांजैक्शन को शुल्क से सुरक्षा दी गई है। यह छूट ₹2,000 से अधिक के लेनदेन पर लागू नहीं होती।

इसी वजह से ऐसी अटकलें बढ़ी हैं कि भविष्य में बड़े पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) UPI ट्रांजैक्शन के लिए MDR का अलग फ्रेमवर्क बनाया जा सकता है।

राहुल गांधी ने सरकार से पूछा सवाल

राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि अगर ग्राहकों से सीधे कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा, तो व्यापारियों पर लगने वाला शुल्क आखिर कौन वहन करेगा। उन्होंने आशंका जताई कि व्यापारी अतिरिक्त लागत की भरपाई के लिए वस्तुओं और सेवाओं की कीमतें बढ़ाकर इसका बोझ ग्राहकों पर डाल सकते हैं।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नीति में बदलाव उन अमेरिकी पेमेंट कंपनियों की मांगों के अनुरूप है, जो भारत की जीरो-MDR व्यवस्था का लंबे समय से विरोध करती रही हैं। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अमेरिका के दबाव में झुकने का आरोप लगाते हुए इसे भारत-अमेरिका व्यापारिक संबंधों से जुड़ी बहस से भी जोड़ा।

UPI पर मौजूदा जीरो-MDR व्यवस्था

भारत में जनवरी 2020 से UPI के P2M लेनदेन के लिए जीरो-MDR व्यवस्था लागू है। सरकार इसके बजाय इंसेंटिव स्कीम के जरिए UPI इकोसिस्टम को समर्थन देती रही है।

नए बदलाव से ₹2,000 तक के UPI भुगतान के लिए कानूनी तौर पर शुल्क-मुक्त व्यवस्था स्पष्ट होती है, जबकि इससे अधिक राशि वाले मर्चेंट भुगतान के लिए भविष्य में अलग नियम बनाने की गुंजाइश बनी रहती है।

सरकार का तर्क है कि भविष्य में एक तय MDR फ्रेमवर्क UPI इकोसिस्टम को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाने में मदद कर सकता है, क्योंकि डिजिटल लेनदेन की संख्या लगातार बढ़ रही है। साथ ही, कम मूल्य वाले रोजमर्रा के डिजिटल भुगतानों को शुल्क से सुरक्षा देने की व्यवस्था भी बनी रहेगी।