मयूरभंज, एजेंसी। ओडिशा के मयूरभंज जिले का छोटा सा आदिवासी गांव बबेइजोड़ा अपनी अनूठी स्वच्छता व्यवस्था के कारण देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। पिछले करीब 15 वर्षों से यह गांव कचरा और प्लास्टिक मुक्त बना हुआ है। खूबसूरत और हराभरा बबेइजोड़ा बिशोई ब्लॉक में राष्ट्रीय राजमार्ग-49 से महज दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और बारिपदा से करीब 70 किलोमीटर दूर है।
गांव की स्वच्छता व्यवस्था यह साबित करती है कि यह कोई अस्थायी अभियान नहीं, बल्कि यहां के लोगों की जीवनशैली का हिस्सा बन चुकी है। ग्रामीणों ने दिखाया है कि स्वच्छता बनाए रखने के लिए बड़े बजट से ज्यादा जरूरी सामूहिक जिम्मेदारी, ईमानदार सोच और दृढ़ इच्छाशक्ति है। गांव की सड़कें और गलियां साफ-सुथरी रहती हैं और कहीं भी कूड़ा बिखरा नजर नहीं आता। हर निवासी अपने आसपास के वातावरण को स्वच्छ रखने में सक्रिय भूमिका निभाता है।
महिलाएं दिन में तीन बार करती हैं सफाई
बबेइजोड़ा में गंदगी फैलाने, सार्वजनिक स्थानों पर थूकने, धूम्रपान करने और प्लास्टिक के इस्तेमाल पर प्रतिबंध है। गांव की महिलाएं दिन में तीन बार सड़कों और गलियों की सफाई करती हैं। कचरा जमा करने के लिए हर 30 मीटर पर बांस से बने डस्टबिन लगाए गए हैं। वहीं, युवा स्वयंसेवक रोजाना कचरा एकत्र करते हैं और जैविक कचरे से कंपोस्ट तैयार करते हैं।
CCTV से निगरानी, गंदगी फैलाने पर जुर्माना
स्वच्छता व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखने के लिए गांव में CCTV कैमरे भी लगाए गए हैं। इनके जरिए स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटकों पर भी नजर रखी जाती है। नियमों का उल्लंघन कर गंदगी फैलाने वालों पर जुर्माना लगाया जाता है।
बबेइजोड़ा की स्वच्छता और खूबसूरती पर्यटकों को भी आकर्षित करती है। ओडिशा के विभिन्न हिस्सों के अलावा पश्चिम बंगाल, झारखंड और देश के अन्य राज्यों से घरेलू पर्यटक यहां पहुंचते हैं।
मिट्टी के घरों पर पारंपरिक चित्रकारी
गांव की एक और खासियत यहां के मिट्टी के घर हैं। इन घरों की दीवारों पर गांव की महिलाओं ने मिट्टी, फूल, पत्थरों और पेड़ों की छाल से तैयार प्राकृतिक रंगों के जरिए खूबसूरत पारंपरिक चित्रकारी की है। इससे गांव की प्राकृतिक सुंदरता और बढ़ जाती है।
स्थानीय शिक्षक ने शुरू किया था स्वच्छता अभियान
बबेइजोड़ा के स्वच्छता आंदोलन की शुरुआत करीब 15 साल पहले स्थानीय आदिवासी शिक्षक मधुसूदन मरांडी ने की थी। धीरे-धीरे ग्रामीण भी इस पहल से जुड़ते गए और स्वच्छता को सामूहिक जिम्मेदारी बना लिया। आज बबेइजोड़ा यह संदेश दे रहा है कि किसी गांव को स्वच्छ और सुंदर बनाने के लिए सिर्फ संसाधन नहीं, बल्कि लोगों की भागीदारी और मजबूत इच्छाशक्ति भी जरूरी है।


