नई दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद पी. चिदंबरम ने वी-डेम के ‘चुनावी लोकतंत्र सूचकांक’ में भारत की रैंकिंग को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि 179 देशों की सूची में भारत 106वें स्थान पर है और सूचकांक में देश का स्कोर 1975 के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है।
चिदंबरम ने मंगलवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट कर कहा कि भारत का चुनावी लोकतंत्र सूचकांक में स्कोर 0.38 है। इसके आधार पर भारत 179 देशों में 106वें स्थान पर है। उन्होंने इस रिपोर्ट को लेकर मोदी सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए।
लिबरल डेमोक्रेसी इंडेक्स में भी भारत की रैंकिंग नीचे
वी-डेम की रिपोर्ट के मुताबिक, लिबरल डेमोक्रेसी इंडेक्स में भारत को 0.26 का स्कोर मिला है और वह 105वें स्थान पर है। कांग्रेस लंबे समय से लोकतांत्रिक संस्थाओं और चुनाव प्रक्रिया को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाती रही है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी भी कई मौकों पर चुनाव में ‘वोट चोरी’ के आरोप लगा चुके हैं।
कैसे तैयार होता है लोकतंत्र सूचकांक?
वी-डेम इंस्टीट्यूट लोकतंत्र के विभिन्न पहलुओं को मापने के लिए कई संकेतकों का इस्तेमाल करता है। इसमें चुनाव की स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की आजादी, मीडिया की स्वतंत्रता, नागरिक समाज की स्थिति और राजनीतिक भागीदारी जैसे पहलू शामिल हैं। संस्थान जनसंख्या-भारित उपायों का भी इस्तेमाल करता है, जिससे अलग-अलग देशों में लोकतांत्रिक व्यवस्था की स्थिति का आकलन किया जाता है।
भारत को ‘इलेक्टोरल ऑटोक्रेसी’ श्रेणी में रखा
रिपोर्ट में भारत को ‘इलेक्टोरल ऑटोक्रेसी’ यानी चुनावी तानाशाही की श्रेणी में रखा गया है। दक्षिण और मध्य एशिया के देशों का उल्लेख करते हुए रिपोर्ट में नेपाल और श्रीलंका समेत कई देशों में लोकतांत्रिक व्यवस्था की स्थिति का आकलन किया गया है। भारत के साथ किर्गिस्तान और पाकिस्तान को भी इसी श्रेणी में रखा गया है, जबकि अफगानिस्तान और तुर्कमेनिस्तान को ‘क्लोज्ड ऑटोक्रेसी’ यानी बंद तानाशाही की श्रेणी में रखा गया है।
2009 के बाद भारत में लोकतांत्रिक गिरावट का दावा
वी-डेम के अनुसार, भारत में वर्ष 2009 के बाद लोकतांत्रिक व्यवस्था में धीरे-धीरे गिरावट देखी गई है। रिपोर्ट में लोकतांत्रिक संस्थाओं के कमजोर होने, अभिव्यक्ति और मीडिया की स्वतंत्रता में कमी तथा सरकार की आलोचना करने वाले पत्रकारों और नागरिक समाज पर दबाव जैसे मुद्दों को इसका कारण बताया गया है।
वी-डेम इंस्टीट्यूट स्वीडन के गोथेनबर्ग विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग से संबद्ध है और लोकतंत्र से जुड़े वैश्विक आंकड़ों व सूचकांकों पर शोध करता है।

