नई दिल्ली, एजेंसी। देशभर में सड़कों पर आवारा पशुओं के कारण बढ़ते सड़क हादसों पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने केंद्र और सभी राज्य सरकारों को निर्देश दिया है कि ऐसे मामलों में पीड़ितों को मुआवजा देने के लिए प्रभावी तंत्र तैयार किया जाए। साथ ही कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आवारा घूमने वाले पशुओं के मालिकों की जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए।
जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने कहा कि जिन राज्यों में मवेशियों से जुड़े कानून पहले से लागू हैं, उन्हें सख्ती और तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए। अदालत ने यह भी कहा कि पशु मालिक यह सुनिश्चित करें कि उनके पशु दिन समाप्त होने के बाद अपने निर्धारित स्थान या बाड़े में लौट आएं, ताकि वे सड़कों पर घूमकर दुर्घटनाओं का कारण न बनें।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों को सुझाव दिया कि पैदल यात्रियों और वाहन चालकों, दोनों के साथ आवारा पशुओं की वजह से होने वाले हादसों में मुआवजा देने के लिए कानूनों में आवश्यक संशोधन किए जाएं या उपयुक्त नियम बनाए जाएं।
सभी पशुओं की टैगिंग अनिवार्य करने का निर्देश
अदालत ने सभी पशुओं की टैगिंग अनिवार्य करने का भी निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि टैगिंग से पशुओं की पहचान, निगरानी, स्वास्थ्य सेवाओं, टीकाकरण और पशु चिकित्सा जांच को बेहतर तरीके से सुनिश्चित किया जा सकेगा।
किस मामले में आया फैसला?
यह फैसला पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली एक महिला की अपील पर सुनवाई के दौरान आया। महिला के पति की सड़क पर पैदल चलते समय एक आवारा सांड की टक्कर से मौत हो गई थी। सिर में गंभीर चोट लगने के कारण उनकी जान चली गई थी।
पति की मृत्यु के बाद महिला ने मुआवजे की मांग करते हुए हाई कोर्ट का रुख किया। हाई कोर्ट की एकल-न्यायाधीश पीठ ने मृतक की आय, आयु और अन्य परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के तहत 29.32 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया था। हालांकि बाद में हाई कोर्ट की खंडपीठ ने इस आदेश को रद्द कर दिया। इसी फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी, जहां सुनवाई के दौरान अदालत ने आवारा पशुओं से होने वाली दुर्घटनाओं को लेकर व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए।

