नई दिल्ली। रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के प्यार और अटूट रिश्ते का प्रतीक माना जाता है। इस दिन बहन भाई की कलाई पर राखी बांधती है और उसकी सुख-समृद्धि व लंबी उम्र की कामना करती है। राखी बांधने से पहले थाली सजाने की भी खास परंपरा है। इस थाली में राखी के साथ रोली, अक्षत, मिठाई और दीपक जैसी चीजें रखी जाती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन सभी चीजों का अपना अलग महत्व है?
रोली से शुरू होती है शुभ रस्म
राखी बांधने से पहले बहन भाई के माथे पर रोली का तिलक लगाती है। भारतीय परंपरा में तिलक को शुभता और मंगल का प्रतीक माना जाता है। भाई के माथे पर रोली लगाने के पीछे उसके सुखी और खुशहाल जीवन की कामना की भावना जुड़ी होती है।
अक्षत यानी चावल का क्या महत्व?
रोली के बाद माथे पर अक्षत लगाए जाते हैं। अक्षत का अर्थ है ऐसा चावल जो टूटा हुआ न हो। धार्मिक परंपराओं में इसे पूर्णता, समृद्धि और स्थायित्व से जोड़ा जाता है। राखी के मौके पर अक्षत लगाने का अर्थ भाई के जीवन में सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना करना माना जाता है।
मिठाई से रिश्ते में घुलती है मिठास
राखी बांधने के बाद बहन भाई का मुंह मीठा कराती है। मिठाई केवल एक रस्म नहीं, बल्कि भाई-बहन के रिश्ते में प्रेम और मिठास का प्रतीक मानी जाती है। इसके बाद भाई भी बहन को मिठाई खिलाकर अपनी खुशी जाहिर करता है।
दीपक और आरती का भी है खास स्थान
राखी की थाली में दीपक रखना भी शुभ माना जाता है। बहन भाई की आरती उतारती है और उसके अच्छे स्वास्थ्य, सुख और समृद्धि की कामना करती है। दीपक को सकारात्मकता और प्रकाश का प्रतीक माना जाता है।
राखी है सबसे खास
इन सभी चीजों के बीच राखी का महत्व सबसे खास होता है। भाई की कलाई पर बंधा यह धागा भाई-बहन के प्यार, विश्वास और एक-दूसरे के साथ खड़े रहने की भावना को दर्शाता है। आज के बदलते दौर में राखी का संदेश सिर्फ सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आपसी सम्मान और सहयोग का प्रतीक भी बनती जा रही है।
इस तरह राखी की थाली में रखी हर चीज अपने साथ एक खास भावना लेकर आती है। रोली शुभता, अक्षत समृद्धि, मिठाई रिश्ते की मिठास और दीपक सकारात्मकता का संदेश देता है। यही वजह है कि रक्षाबंधन की यह छोटी-सी रस्म भाई-बहन के रिश्ते को और भी खास बना देती है।

