लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किसानों और खेतिहर मजदूरों के मेधावी बच्चों के लिए संचालित मुख्यमंत्री कृषक छात्रवृत्ति योजना का दायरा बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत छात्रवृत्ति की राशि 3,000 रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 5,000 रुपये प्रतिमाह किए जाने का फैसला लिया गया है।
शुक्रवार को उत्तर प्रदेश राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद की 172वीं संचालक मंडल बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि छात्रवृत्ति राशि बढ़ाने के साथ-साथ अधिक से अधिक पात्र विद्यार्थियों को योजना का लाभ दिलाने के लिए प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जाए।
किसान सहायता योजनाओं की अवधि 2030 तक बढ़ी
बैठक में मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना सहायता योजना और मुख्यमंत्री खेत-खलिहान अग्निकांड दुर्घटना सहायता योजना की अवधि 1 जुलाई 2025 से 30 जून 2030 तक बढ़ाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई। इन योजनाओं के संचालन के लिए वित्त वर्ष 2026-27 में 30 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है।
कृषि और मंडी विकास के लिए ₹3,025.49 करोड़ का बजट
संचालक मंडल ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 3,025.49 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी। इस बजट में किसान कल्याण, कृषि विपणन, मंडी विकास, ग्रामीण हाट, किसान बाजार, छात्रावास निर्माण, संपर्क मार्ग, गोवंशी आश्रय स्थल और भूमि क्रय जैसी योजनाओं के लिए धन का प्रावधान किया गया है। पहले से स्वीकृत निर्माण कार्यों के लिए 1,212.02 करोड़ रुपये भी निर्धारित किए गए हैं।
आधुनिक सुविधाओं से लैस होंगी प्रदेश की मंडियां
मुख्यमंत्री ने मंडियों के आधुनिकीकरण और पुनर्विकास पर विशेष जोर देते हुए कहा कि किसानों को बेहतर विपणन सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए मंडियों में पेयजल, स्वच्छता, प्रकाश व्यवस्था और अन्य बुनियादी सुविधाओं को मजबूत किया जाए। उन्होंने PPP मॉडल के तहत कृषि प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना को बढ़ावा देने और निवेश के अनुकूल नियम बनाने के भी निर्देश दिए।
ई-नाम और प्राकृतिक खेती को मिलेगा बढ़ावा
मुख्यमंत्री ने अधिक से अधिक मंडियों को ई-नाम (राष्ट्रीय कृषि बाजार) प्लेटफॉर्म से जोड़ने, राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन को आगे बढ़ाने और प्रत्येक जिले में जैविक उत्पादों के प्रमाणन की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कृषि प्रसंस्करण से किसानों को उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
बैठक में मूल्य समर्थन योजना के तहत दलहन और तिलहन की खरीद को अधिक प्रभावी बनाने के लिए विभिन्न सहकारी संस्थाओं को ब्याजमुक्त कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराने के प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई।

