15 हजार की मामूली इंटर्नशिप कर रहा था इंजीनियर, अब गूगल में मिली 7.5 करोड़ की नौकरी

नई दिल्ली। क्या 15,000 रुपये महीने कमाने वाला इंटर्न कभी साल के 7.5 करोड़ रुपये कमा सकता है? यह सवाल सुनने में किसी फिल्मी स्टोरी जैसा लग सकता है। मशहूर उद्यमी अंकुर वारिकू ने हाल ही में एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की कहानी शेयर की है। इस शख्स ने 15 हजार रुपये के मामूली स्टाइपेंड से करियर की शुरुआत की थी। तब वह इंटर्न था। अब उसे गूगल में नौकरी मिल गई है और वह 7.5 करोड़ सालाना कमा रहा है।
अंकुर वारिकू के अनुसार, सैलरी में इतनी जबरदस्त छलांग के पीछे कोई जादुई चिराग नहीं, बल्कि सोची-समझी स्ट्रैटेजी और सख्त डिसिप्लिन है। इस इंजीनियर ने न केवल अपनी टेक्निकल स्किल्स पर काम किया, बल्कि मार्केट की नब्ज भी पकड़ी। उसने 500 से ज्यादा कोडिंग समस्याएं सुलझाईं और हर 2 साल में अपनी ‘मार्केट वैल्यू’ चेक करने के लिए जॉब स्विच की।
15 हजार रुपये की इंटर्नशिप से करियर की शुरुआत
इस सक्सेस स्टोरी का हीरो किसी चांदी की चम्मच के साथ पैदा नहीं हुआ था। करियर के शुरुआती दिनों में उसने एक छोटी फर्म में इंटर्नशिप की, जहां उसे केवल 15,000 रुपये प्रति माह (सालाना 1.8 लाख) मिलते थे। लेकिन उसने इस समय को बर्बाद नहीं किया, बल्कि खुद को भविष्य के लिए तैयार करने में किया। शुरुआती 2-3 सालों में इस सॉफ्टवेयर इंजीनियर इंटर्न का पूरा फोकस उन बेसिक टेक्नीक्स को सीखने पर था, जिनकी मांग भविष्य में बढ़ने वाली थी। अंकुर वारिकू ने बताया कि इस शख्स ने तकनीकी इंटरव्यू के सबसे कठिन स्तर को पार करने के लिए LeetCode पर लगभग 500 से अधिक कोडिंग समस्याएं हल कीं। सिर्फ इतना ही नहीं, उसने दुनियाभर के डेवलपर्स के साथ जुड़ने के लिए 12 ओपन-सोर्स प्रोजेक्ट्स में एक्टिव रूप से योगदान दिया। इस दौरान वह अपनी जॉब के साथ-साथ खुद को अपस्किल भी कर रहे थे। इसी मेहनत ने उनके पोर्टफोलियो को इतना मजबूत बना दिया कि टॉप कंपनियां उन्हें नजरअंदाज नहीं कर पाईं।
हर 2 साल में बदल ली नौकरी
इस सफर का सबसे अहम हिस्सा है ‘जॉब स्विचिंग’। अंकुर वारिकू लिखते हैं कि इस सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने करियर के लिए एक बहुत ही गजब नियम बनाया था- हर दो साल में नई नौकरी ढूंढना। अक्सर लोग एक ही कंपनी में 5-10 साल बिताकर ‘वफादार’ कहलाना पसंद करते हैं, लेकिन इस शख्स ने ‘मार्केट वैल्यू’ को प्राथमिकता दी। हर दो साल में स्विच करने से उसे न केवल भारी सैलरी हाइक मिली, बल्कि हर बार नई तकनीक और नए कल्चर में काम करने का मौका मिला, जिससे उसका अनुभव कई गुना बढ़ गया।
ले-ऑफ और रिजेक्शन से नहीं डरे
इस सफर में रिजेक्शन और बाजार के उतार-चढ़ाव भी आए। लेकिन इस सॉफ्टवेयर इंजीनियर की तैयारी इतनी पुख्ता थी कि कोई भी बाधा उन्हें रोक नहीं सकी। जब वह 40-50 लाख के पैकेज पर पहुंचा, तब भी उसने खुद को अपडेट करना बंद नहीं किया। आखिरकार उसकी स्किल्स और अनुभव का मेल ऐसा बैठा कि दुनिया की दिग्गज कंपनी गूगल ने उसे 7.5 करोड़ रुपये सालाना के भारी-भरकम पैकेज का ऑफर दिया।

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