नई दिल्ली: महिला पहलवानों के कथित यौन उत्पीड़न मामले में बीजेपी के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह को बड़ी राहत मिली है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने सोमवार को उन्हें और सह-आरोपी विनोद तोमर को आरोपों से बरी कर दिया। फैसले के बाद बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि उन्हें शुरू से ही न्यायपालिका पर भरोसा था और आज वही विश्वास सच साबित हुआ।
‘आरोप साबित होते तो खुद फांसी पर चढ़ जाता’
कोर्ट के फैसले के बाद मीडिया से बातचीत में बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि जब जनवरी 2023 में उनके खिलाफ आरोप लगे थे, तभी उन्होंने साफ कहा था कि यदि एक भी आरोप साबित हुआ तो वे स्वयं फांसी पर लटक जाएंगे। उन्होंने कहा कि लगभग तीन साल बाद अदालत ने उन्हें सम्मानपूर्वक बरी कर दिया, जो उनके और उनके समर्थकों के लिए खुशी का विषय है। उन्होंने अपनी बात समाप्त करते हुए कहा, “होइहि सोइ जो राम रचि राखा।”
‘मेरे खिलाफ साजिश रची गई थी’
बृजभूषण ने दोहराया कि 18 जनवरी 2023 को ही उन्होंने इस पूरे मामले को साजिश बताया था। उनका कहना था कि वे अपने बयान पर आज भी कायम हैं और अदालत के फैसले ने उनकी बात को सही साबित किया है। उन्होंने दावा किया कि जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान उनके लिए फांसी देने और जिंदा जलाने जैसी मांगें भी उठाई गई थीं।
‘मुझे पूरा भरोसा था कि न्याय मिलेगा’
उन्होंने कहा कि बचपन से ही उन्होंने संघर्ष का सामना किया है और हमेशा कमजोर व पीड़ित लोगों के साथ खड़े रहे हैं। बृजभूषण ने कहा कि उन्होंने कभी खुद को अपराधी नहीं माना और उन्हें पूरा विश्वास था कि अदालत से उन्हें न्याय मिलेगा। उनके मुताबिक, अब अदालत के फैसले ने उनके विश्वास को सही साबित कर दिया है।
बेटे करण भूषण ने भी जताई खुशी
कोर्ट के फैसले पर बृजभूषण शरण सिंह के बेटे और कैसरगंज से बीजेपी सांसद करण भूषण सिंह ने भी खुशी जताई। उन्होंने कहा कि वे अदालत के फैसले का सम्मान करते हैं और इसके लिए न्यायपालिका का आभार व्यक्त करते हैं। करण ने इसे “सच्चाई, युवा पहलवानों और कैसरगंज की जीत” बताया। साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि जो राजनीतिक दल पहले उनके पिता के खिलाफ बयान दे रहे थे, क्या अब वे स्वीकार करेंगे कि उनके साथ गलत हुआ था।
2024 चुनाव में नहीं मिला था टिकट
बृजभूषण शरण सिंह बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं और उत्तर प्रदेश की कैसरगंज लोकसभा सीट से छह बार सांसद रह चुके हैं। हालांकि महिला पहलवानों के आरोपों के बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया था। उनकी जगह बेटे करण भूषण सिंह को उम्मीदवार बनाया गया, जिन्होंने चुनाव जीतकर सीट बरकरार रखी।

