संयुक्त राष्ट्र में ब्रिटेन के खिलाफ किस प्रस्ताव पर भारत ने किया वोट? लंदन की बढ़ी टेंशन

संयुक्त राष्ट्र। संयुक्त राष्ट्र में ब्रिटेन को एक बड़ा झटका लगा है। अफ्रीकी देशों की मांग पर UN जनरल असेंबली में एक प्रस्ताव पास किया गया है, जिसमें ब्रिटेन और अन्य पूर्व उपनिवेशवादी देशों से ट्रांसअटलांटिक गुलाम व्यापार के लिए मुआवजा देने की मांग की गई है। इस प्रस्ताव में गुलाम व्यापार को मानवता के खिलाफ सबसे गंभीर अपराध बताया गया है।
यह प्रस्ताव अफ्रीकी देश घाना की ओर से अफ्रीकी संघ के तत्वावधान में पेश किया गया था। इस पर हुए वोटिंग में 124 देशों ने समर्थन किया, जिसमें भारत भी शामिल है। इस प्रस्ताव का तीन देशों ने विरोध किया और 52 देशों ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया।
इस बिल का विरोध करने वाले देशों में अमेरिका, इजराइल और अर्जेंटीना शामिल हैं। वहीं ब्रिटेन के साथ फ्रांस और यूरोपीय संघ के कई देशों ने वोटिंग से परहेज किया है। ब्रिटेन ने साफ कर दिया कि वह इस प्रस्ताव से सहमत नहीं है। ब्रिटेन के प्रतिनिधि ने कहा कि उन्हें प्रस्ताव में इस्तेमाल की गई कानूनी भाषा पर आपत्ति है। ब्रिटेन के विदेश कार्यालय के प्रवक्ता ने साफ शब्दों में कहा, “ब्रिटेन का रुख साफ है, हम मुआवजा नहीं देंगे।”
अब आगे क्या होगा?
यह प्रस्ताव कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है, लेकिन यह अफ्रीकी देशों के लिए एक बड़ी राजनयिक जीत है। अब अफ्रीकी देश इस मामले को अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में ले जाने की तैयारी कर रहे हैं। उनका तर्क है कि गुलाम व्यापार की वजह से अफ्रीका का विकास रुका और आज भी इसकी वजह से नस्लभेद की समस्या बनी हुई है।
अमेरिका ने क्यों किया विरोध?
अमेरिका ने इस प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा कि वह मानवता के खिलाफ अपराधों की रैंकिंग बनाने का विरोध करता है। अमेरिका ने उन मुस्लिम देशों के गुलाम व्यापार का भी मुद्दा उठाया जो 20वीं सदी तक जारी रहा। UN में ब्रिटेन के खिलाफ पारित इस प्रस्ताव में मुआवजे की मांग की गई है। भारत ने इसके समर्थन में वोट किया, जिससे ब्रिटेन की मुश्किलें बढ़ गई हैं। अब अगला दौर अंतरराष्ट्रीय अदालत में लड़ा जा सकता है।

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