‘भारत का अफ्रीका से रिश्ता फायदेमंद, यह शोषणकारी मॉडल पर आधारित नहीं’, जयशंकर का बयान

नई दिल्ली। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने टोक्यो में जापान-भारत-अफ्रीका बिजनेस फोरम में कहा कि भारत और जापान, अपनी विशेषताओं को मिलाकर, अफ्रीका के विकास में टिकाऊ और समावेशी योगदान दे सकते हैं। इस दौरान विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि भारत का अफ्रीका के प्रति रुख हमेशा से दीर्घकालिक और लाभकारी साझेदारी पर आधारित रहा है, न कि सिर्फ संसाधन निकालने पर। उन्होंने यह बयान ऐसे समय में दिया जब चीन अफ्रीका में अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
उन्होंने बताया कि भारत का ध्यान क्षमता निर्माण, कौशल विकास और तकनीकी स्थानांतरण पर है ताकि अफ्रीकी देश आत्मनिर्भर बन सकें। भारत अफ्रीका का चौथा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है और दोनों देशों के बीच व्यापार 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है।
भारत ने अफ्रीका में 200 से अधिक परियोजनाएं पूरी की
भारत ने अफ्रीका में कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 12 अरब अमेरिकी डॉलर की रियायती सहायता दी है। भारत ने वहां 200 से अधिक परियोजनाएं पूरी की हैं, जिनमें रेलवे, बिजली उत्पादन, कृषि और जल आपूर्ति शामिल हैं।
‘विकास कार्यों से स्थानीय लोगों को रोजगार और उनका जीवन बेहतर बना’
विदेश मंत्री ने कहा कि भारत की तरफ से किए गए विकास कार्यों ने स्थानीय लोगों को रोजगार दिया और उनके जीवन को बेहतर बनाया। उन्होंने यह भी कहा कि भारत अफ्रीका और अन्य देशों के लिए एक महत्वपूर्ण औद्योगिक केंद्र बन सकता है, जहां जापानी कंपनियां निवेश कर सकती हैं।
भारत-जापान-अफ्रीका बना सकते हैं आत्मनिर्भर आपूर्ति शृंखला- जयशंकर
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के अनुसार, भारत और जापान मिलकर अफ्रीका में मजबूत और आत्मनिर्भर आपूर्ति शृंखला बना सकते हैं, जिससे वहां के विकास को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने आगे कहा, ‘अफ्रीका की प्रगति न केवल वहां के लोगों के लिए फायदेमंद होगी, बल्कि यह वैश्विक स्थिरता और आर्थिक वृद्धि में भी योगदान देगी’।

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