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5 Aug 2026, Wed

प्रत्यर्पण को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाकर सरकार ने अपनाई मिशन मोड रणनीति, तकनीक, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और सख्त कानूनों से कार्रवाई तेज


नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में वर्ष 2019 से जुलाई 2026 तक 36 देशों से 274 भगोड़े अपराधियों को भारत वापस लाया गया है। सरकार के अनुसार भगोड़े अपराधियों के प्रत्यर्पण को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाते हुए एकीकृत, खुफिया आधारित और प्रौद्योगिकी संचालित रणनीति अपनाई गई, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की कार्रवाई को नई गति मिली है।
सरकार ने बताया कि भगोड़े अपराधियों का मुद्दा केवल कानून व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की संप्रभुता, आर्थिक स्थिरता, राष्ट्रीय सुरक्षा और न्याय व्यवस्था से भी जुड़ा हुआ है। इसी दृष्टिकोण से गृह मंत्रालय ने प्रत्यर्पण प्रक्रिया को मिशन मोड में आगे बढ़ाते हुए कानूनी, कूटनीतिक और तकनीकी स्तर पर कई महत्वपूर्ण सुधार किए हैं।
पहले की तुलना में प्रत्यर्पण प्रक्रिया हुई तेज
सरकार के अनुसार वर्ष 2014 से पहले प्रत्यर्पण प्रक्रिया कई कानूनी और प्रक्रियागत बाधाओं से प्रभावित थी। सीमित प्रत्यर्पण संधियां, अधूरे दस्तावेज, विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी तथा जटिल कानूनी प्रक्रियाओं के कारण प्रत्यर्पण अनुरोधों में विलंब होता था। वर्ष 2004 से 2013 के दौरान औसतन केवल चार भगोड़े अपराधियों का प्रतिवर्ष प्रत्यर्पण हो पाता था।
सरकार का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था में प्रत्यर्पण को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाते हुए वैश्विक सहयोग, बेहतर समन्वय और प्रभावी कूटनीति पर विशेष बल दिया गया है।
कानूनी ढांचे को किया गया मजबूत
सरकार ने बताया कि वर्ष 2019 में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) संशोधन अधिनियम और गैरकानूनी गतिविधियां (निवारण) संशोधन अधिनियम लागू किए गए, जिससे व्यक्तिगत आतंकियों, उनके सहयोगियों और वित्तीय नेटवर्क पर कार्रवाई का दायरा बढ़ा।
इसके अलावा वर्ष 2024 में लागू तीन नए आपराधिक कानूनों में भगोड़े अपराधियों से संबंधित विशेष प्रावधान शामिल किए गए। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 355 और 356 के तहत पहली बार अनुपस्थिति में मुकदमे (ट्रायल इन एब्सेंशिया) का प्रावधान किया गया, जिससे आरोपी की गैरमौजूदगी में भी न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है।
इंटरपोल सहयोग और भारतपोल से मिली नई गति
सरकार ने बताया कि वर्ष 2022 में भारत ने इंटरपोल महासभा की मेजबानी की, जिसके बाद अंतरराष्ट्रीय सहयोग और मजबूत हुआ। जनवरी 2025 में शुरू किए गए भारतपोल (क्च॥्रक्र्रञ्जक्कह्ररु) मंच के माध्यम से केंद्रीय और राज्य स्तर की 1,400 से अधिक एजेंसियों को इंटरपोल नेटवर्क से जोड़ा गया है।
इस प्रणाली के कारण विभिन्न जांच एजेंसियों के बीच सूचना साझा करने का समय काफी घट गया है। जहां पहले सूचनाओं के आदान-प्रदान में कई सप्ताह लग जाते थे, वहीं अब अनेक मामलों में यह प्रक्रिया तीन से दस दिनों के भीतर पूरी हो रही है।
रेड कॉर्नर नोटिस और तकनीक आधारित निगरानी
सरकार के अनुसार पिछले तीन वर्षों में 401 भगोड़े अपराधियों के विरुद्ध इंटरपोल द्वारा रेड कॉर्नर नोटिस जारी किए गए हैं। वर्ष 2026 में जुलाई तक 182 रेड कॉर्नर नोटिस जारी किए जा चुके हैं।
विदेशों में नाम और पहचान बदलकर छिपे अपराधियों का पता लगाने के लिए ऑपरेशन त्रिशूल के तहत उपग्रह आधारित निगरानी, डिजिटल फुटप्रिंट, प्रोफाइल मैपिंग और जियो-लोकेशन जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। इसके अलावा प्रत्यर्पण मामलों की सुनवाई में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग जैसी डिजिटल व्यवस्थाओं का भी उपयोग किया जा रहा है।
अवैध संपत्तियों पर भी सख्त कार्रवाई
सरकार ने बताया कि धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के प्रभावी क्रियान्वयन के तहत वर्ष 2019 से 2026 के बीच भगोड़े अपराधियों की 17,874 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई है। इसी अवधि में 18,762 करोड़ रुपये की राशि की सफल वापसी (रेस्टिट्यूशन) भी की गई, जिसमें देश छोड़कर भागे आर्थिक अपराधियों से संबंधित धन शामिल है।
विभिन्न श्रेणियों के अपराधियों की हुई वापसी
सरकार के अनुसार वर्ष 2019 से जुलाई 2026 तक भारत वापस लाए गए 274 भगोड़े अपराधियों में वित्तीय अपराध, आतंकवाद, संगठित अपराध, हत्या, डकैती, यौन अपराध, पॉक्सो, मादक पदार्थों की तस्करी, मानव तस्करी, साइबर अपराध और जाली मुद्रा जैसे गंभीर मामलों में वांछित आरोपी शामिल हैं।
वर्षवार आंकड़ों के अनुसार 2019 में 9, 2020 में 7, 2021 में 23, 2022 में 40, 2023 में 37, 2024 में 43, 2025 में 70 तथा वर्ष 2026 में जुलाई तक 45 भगोड़े अपराधियों को भारत वापस लाया गया।
सभी एजेंसियों के समन्वय से अभियान को मिली सफलता
सरकार ने बताया कि भगोड़े अपराधियों के खिलाफ अभियान में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई), राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए), प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), खुफिया ब्यूरो (आईबी), अनुसंधान एवं विश्लेषण विंग (रॉ), नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी), विदेश मंत्रालय, डीजीजीआई तथा विभिन्न राज्य पुलिस बलों ने समन्वित रूप से कार्य किया है।
इसके अलावा जनवरी 2026 में आईबी के मल्टी एजेंसी सेंटर के अंतर्गत स्टैंडिंग फोकस ग्रुप का गठन किया गया, जो भगोड़े अपराधियों की प्राथमिकता तय करने, दस्तावेजों के मानकीकरण, विदेशी एजेंसियों से समन्वय तथा राज्यों को राष्ट्रीय स्तर पर सहायता उपलब्ध कराने का कार्य कर रहा है।
सरकार का कहना है कि भगोड़े अपराधियों के विरुद्ध यह अभियान केवल प्रत्यर्पण तक सीमित नहीं है, बल्कि आतंकवाद, संगठित अपराध, आर्थिक अपराध, मादक पदार्थों की तस्करी, साइबर अपराध और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के विरुद्ध व्यापक रणनीति का हिस्सा है। इसके माध्यम से कानून के शासन को मजबूत करने, पीड़ितों को न्याय दिलाने और राष्ट्रीय सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

By Aryavartkranti Bureau

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