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5 Aug 2026, Wed

लिव-इन रिलेशनशिप पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, बिना शादी साथ रहने वाली महिलाओं को भी मिलेगा धारा 498ए का संरक्षण

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों को लेकर अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा है कि यदि कोई महिला ऐसे रिश्ते में रहती है जो विवाह जैसे संबंध की श्रेणी में आता है और उसके साथ क्रूरता या उत्पीड़न होता है, तो वह भी भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 498ए के तहत कानूनी संरक्षण पाने की हकदार होगी। ऐसे मामलों में महिला अपने पुरुष साथी और उसके रिश्तेदारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा सकेगी।

सिर्फ ‘विवाह जैसे संबंध’ पर लागू होगा फैसला

जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था हर लिव-इन रिलेशनशिप पर लागू नहीं होगी। केवल वही संबंध इस दायरे में आएंगे, जिन्हें परिस्थितियों के आधार पर विवाह जैसा माना जा सके। अदालत ने कहा कि ऐसे रिश्ते में भविष्य में विवाह की मंशा और दोनों बालिग व्यक्तियों का अपनी इच्छा से साथ रहना महत्वपूर्ण शर्तें हैं।

गिरफ्तारी से पहले होगी प्रारंभिक जांच

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में पुलिस सीधे गिरफ्तारी नहीं करेगी। यदि किसी पुरुष या उसके परिजनों पर धारा 498ए के तहत आरोप लगाए जाते हैं, तो गिरफ्तारी से पहले प्रारंभिक जांच करना और कानून में निर्धारित सभी प्रक्रियाओं का पालन करना अनिवार्य होगा। अदालत ने यह भी कहा कि यह व्याख्या केवल धारा 498ए के संदर्भ में लागू होगी।

महिलाओं के बीच भेदभाव नहीं किया जा सकता

अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 14 का हवाला देते हुए कहा कि घरेलू हिंसा से सुरक्षा के मामले में विवाहित महिला और विवाह जैसे लिव-इन संबंध में रहने वाली महिला के बीच अंतर करना उचित नहीं है। अदालत ने कहा कि किसी भी महिला को केवल उसके वैवाहिक दर्जे के आधार पर कानूनी संरक्षण से वंचित नहीं किया जा सकता। यदि किसी महिला के साथ रिश्ते में क्रूरता होती है, तो उसे समान कानूनी सुरक्षा मिलनी चाहिए।

By Aryavartkranti Bureau

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