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24 Jan 2026, Sat

योगी सरकार के पौने नौ साल: उत्तर प्रदेश बना देश का सबसे बड़ा निवेश गंतव्य

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने बीते पौने नौ वर्षों में विकास की ऐसी यात्रा तय की है, जो वर्ष 2017 से पहले कल्पना से परे मानी जाती थी। कभी निवेशकों के लिए अविश्वसनीय समझा जाने वाला उत्तर प्रदेश आज देश का सबसे बड़ा निवेश गंतव्य बन चुका है। वर्ष 2018 की पहली इन्वेस्टर्स समिट से लेकर 2023 की ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट तक योगी सरकार ने निवेश को केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं रखा, बल्कि ग्राउंड ब्रेकिंग और प्रभावी क्रियान्वयन के मॉडल के जरिए उसे धरातल पर उतारा।प्रदेश में अब तक 15 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश वाली 16 हजार से ज्यादा परियोजनाओं का शिलान्यास हो चुका है। इनमें से हजारों परियोजनाएं व्यावसायिक रूप से संचालित हो चुकी हैं, जिससे लाखों युवाओं को रोजगार के अवसर मिले हैं। प्रधानमंत्री गति शक्ति मास्टर प्लान, डिफेंस कॉरिडोर, सेमीकंडक्टर नीति, आईटी-आईटीईएस, डेटा सेंटर और इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में किए गए सुनियोजित प्रयासों ने उत्तर प्रदेश को बीमारू राज्य की छवि से बाहर निकालकर भारत के औद्योगिक विकास का अग्रणी राज्य बना दिया है। बेहतर कानून-व्यवस्था, पारदर्शिता और समयबद्ध निर्णयों के साथ यह स्पष्ट हुआ है कि उत्तर प्रदेश अब संभावनाओं को परिणाम में बदलने वाला राज्य है।वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश की पहचान कमजोर कानून-व्यवस्था, निवेशकों की उदासीनता और अधूरी परियोजनाओं से जुड़ी थी। उद्योग स्थापित करने में वर्षों लग जाते थे, फाइलें दफ्तरों में अटकी रहती थीं और रोजगार की तलाश में युवाओं को प्रदेश से बाहर जाना पड़ता था। इंफ्रास्ट्रक्चर, एक्सप्रेसवे, औद्योगिक पार्क और आधुनिक लॉजिस्टिक्स की कमी ने राज्य की अर्थव्यवस्था को सीमित कर रखा था। सत्ता संभालते ही योगी आदित्यनाथ ने कानून-व्यवस्था, पारदर्शिता और सुशासन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, इन्वेस्ट यूपी और निवेश सारथी जैसे प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से निवेशकों का भरोसा बहाल किया गया। वर्ष 2018 की इन्वेस्टर्स समिट से शुरू हुई यह यात्रा 2023 की ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट तक 45 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्तावों तक पहुंची और यह क्रम लगातार जारी है।योगी सरकार की एक बड़ी उपलब्धि यह रही कि निवेश केवल एमओयू तक सीमित नहीं रहा। चार ग्राउंड ब्रेकिंग समारोहों के माध्यम से 15 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश वाली 16 हजार से ज्यादा परियोजनाओं का शिलान्यास किया गया। इनमें से 8,300 से अधिक परियोजनाएं व्यावसायिक रूप से संचालित हो चुकी हैं। औद्योगिक नीति के तहत सेमीकंडक्टर, टेक्सटाइल, लेदर, फूड प्रोसेसिंग, प्लास्टिक, परफ्यूम, फार्मा और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे विविध क्षेत्रों को समान रूप से बढ़ावा दिया गया। पीएम मित्र टेक्सटाइल पार्क, मेगा लेदर क्लस्टर, फूड पार्क और फ्लैटेड फैक्ट्री मॉडल ने छोटे और मध्यम निवेशकों को भी औद्योगिक विकास से जोड़ा। आज देश के 65 प्रतिशत से अधिक मोबाइल फोन उत्तर प्रदेश में निर्मित हो रहे हैं और लखनऊ तथा नोएडा जैसे शहर उभरते टेक हब के रूप में पहचान बना चुके हैं।प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के साथ उत्तर प्रदेश ने योजना, भूमि उपयोग और परियोजना क्रियान्वयन को एकीकृत किया। एक्सप्रेसवे आधारित औद्योगिक क्लस्टर, मल्टी-मोडल लॉजिस्टिक्स हब, ट्रांस-गंगा सिटी और ग्रेटर नोएडा निवेश क्षेत्र ने राज्य को इंफ्रास्ट्रक्चर आधारित अर्थव्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ाया। जिला स्तर तक डेटा आधारित योजना आज उत्तर प्रदेश की नई पहचान बन चुकी है। डिफेंस कॉरिडोर, ब्रह्मोस इंटीग्रेशन सुविधा और डिफेंस क्षेत्र की मेगा यूनिट्स ने राज्य को राष्ट्रीय सुरक्षा उत्पादन का अहम केंद्र बनाया है। वहीं डेटा सेंटर नीति, आईटी-आईटीईएस विस्तार और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स के माध्यम से उत्तर प्रदेश डिजिटल और नॉलेज इकॉनमी के नए केंद्र के रूप में उभर रहा है।बुंदेलखंड, पूर्वांचल और तराई क्षेत्रों में औद्योगिक पार्कों की स्थापना यह दर्शाती है कि योगी सरकार का विकास मॉडल केवल पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं है। वर्ष 2017 के बाद पहली बार प्रदेश में क्षेत्रीय संतुलन के साथ औद्योगिकीकरण साकार हुआ है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने यह साबित कर दिया है कि मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति, सख्त प्रशासन और स्पष्ट दृष्टि से किसी भी राज्य की तस्वीर बदली जा सकती है। आज उत्तर प्रदेश बीते कल की चुनौतियों में नहीं, बल्कि भविष्य की संभावनाओं में विश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है और देश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए तैयार खड़ा है।

By Aryavartkranti Bureau

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