घबराने की जरूरत नहीं, देशभर में एलपीजी संकट को लेकर सरकार ने बताई अंदर की बात

नई दिल्ली। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि देश में ईंधन की कोई कमी नहीं है और भारत के पास इस समय पर्याप्त कच्चे तेल का भंडार मौजूद है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अफवाहें न फैलाएं और फर्जी जानकारी से बचें। संसद में बोलते हुए केंद्रीय मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि भारत में ऊर्जा की उपलब्धता पूरी तरह सुरक्षित है।
उन्होंने कहा, भारत की कच्चे तेल की आपूर्ति की स्थिति सुरक्षित है, और हमारे पास जितना तेल उपलब्ध है, वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से मिलने वाली आपूर्ति से कहीं अधिक है।
पुरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मजबूत कूटनीतिक पहल और अंतरराष्ट्रीय संबंधों की वजह से भारत ने इतना कच्चा तेल सुरक्षित कर लिया है, जो संकट के कारण प्रभावित हुए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से मिलने वाली मात्रा से भी अधिक है। उन्होंने बताया कि पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत अपने ऊर्जा आयात के स्रोतों को विविध बना रहा है। इसके तहत देश अब सिर्फ पश्चिम एशिया पर निर्भर नहीं है और घरेलू गैस सप्लाई भी स्थिर बनी हुई है।
उन्होंने कहा कि भारत लगभग 40 देशों से कच्चा तेल आयात करता है, जिससे विभिन्न मार्गों के जरिए ऊर्जा आपूर्ति जारी रहती है और मौजूदा संघर्ष के बावजूद देश में ईंधन की उपलब्धता पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है। पुरी ने कहा कि सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि घरेलू उपभोक्ताओं को कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (सीएनजी) और पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) की पूरी सप्लाई मिलती रहे। मंत्री ने जोर देकर कहा कि सरकार देश भर के घरों तक सस्ती और बिना रुकावट ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा, घरेलू उपभोक्ताओं के लिए किसी तरह की कमी नहीं है और घबराने की कोई जरूरत नहीं है। इससे पहले विदेश मंत्रालय (एमईए) ने कहा था कि भारत ईरान में मौजूद भारतीय नागरिकों की मदद के लिए लगातार काम कर रहा है। साथ ही सरकार पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच जहाजों की सुरक्षा और देश की ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी नजर बनाए हुए है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास जहाजों की आवाजाही को लेकर पूछे गए सवाल पर एमईए के प्रवक्ता ने कहा कि विदेश मंत्री एस जयशंकर और ईरान के विदेश मंत्री के बीच हाल के दिनों में तीन बार बातचीत हो चुकी है। उन्होंने बताया कि आखिरी बातचीत में जहाजों की सुरक्षा और भारत की ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई थी, लेकिन इससे ज्यादा जानकारी देना फिलहाल जल्दबाजी होगी।

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