पाकिस्तानी सेना ने बीएलए लड़ाकों के सामने किया सरेंडर, घुटनों पर बैठे दिखे जवान; 7 दिनों का मिला अल्टीमेटम

क्वेटा।  बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी ने दावा किया है कि उसके लड़ाकों ने हालिया कार्रवाई के दौरान सात पाकिस्तानी सैन्य कर्मियों को बंदी बना लिया है। संगठन ने इन सैनिकों को युद्धबंदी बताया है और उनकी रिहाई के बदले बलूच राजनीतिक कैदियों तथा कथित रूप से लापता व्यक्तियों की रिहाई की मांग की है। बीएलए ने पाकिस्तान सरकार को सात दिनों का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी है कि मांगें पूरी न होने पर बंदियों के खिलाफ तथाकथित बलूच नेशनल कोर्ट में कार्रवाई की जा सकती है। बीएलए के प्रवक्ता ने एक बयान में कहा कि यह कार्रवाई बलूचिस्तान में चल रहे संघर्ष का हिस्सा है। संगठन का आरोप है कि क्षेत्र में सुरक्षा बलों द्वारा बलूच नागरिकों के खिलाफ दमनात्मक कार्रवाइयाँ की जा रही हैं। हालांकि, पाकिस्तानी अधिकारियों की ओर से इस दावे पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आम तौर पर ऐसे दावों की स्वतंत्र पुष्टि तुरंत संभव नहीं होती।
इससे पहले भी बीएलए ने इसी तरह के अल्टीमेटम जारी किए हैं। 2025 में से जुड़े अपहरण मामले में संगठन ने 48 घंटे की समयसीमा दी थी और राजनीतिक कैदियों की रिहाई की मांग की थी। उस घटना के बाद पाकिस्तानी सेना ने ‘ऑपरेशन ग्रीन बोलन’ नामक कार्रवाई चलाकर बंधकों को छुड़ाने का दावा किया था, जबकि बीएलए ने अलग दावा किया था।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे घटनाक्रम बलूचिस्तान में पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ा सकते हैं। यह संघर्ष कई दशकों से जारी है, जिसमें अलगाववादी गतिविधियाँ, सुरक्षा अभियानों और मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप शामिल रहे हैं। मौजूदा दावों और तस्वीरों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है, इसलिए स्थिति पर आधिकारिक और विश्वसनीय स्रोतों से जानकारी का इंतजार किया जा रहा है।

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