नई दिल्ली। जून-जुलाई के दौरान दिल्ली के जंतर-मंतर समेत देश के कई हिस्सों में हुए CJP प्रोटेस्ट को लेकर फिल्मी सितारों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं। अभिनेत्री दीया मिर्जा ने छात्रों की मांगों का समर्थन करते हुए शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही, पारदर्शिता और सुधार की जरूरत पर जोर दिया। वहीं, अभिनेता सिद्धार्थ ने भी युवाओं के विरोध और अपनी बात रखने के अधिकार का खुलकर समर्थन किया।
दीया मिर्जा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर छात्रों के समर्थन में पोस्ट करते हुए कहा कि वह शिक्षा व्यवस्था में अकाउंटेबिलिटी और ट्रांसपेरेंसी की मांग का समर्थन करती हैं। उन्होंने युवाओं की आवाज को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि समाज को उनसे सीखने की जरूरत है।
सिद्धार्थ ने युवाओं की आवाज का किया समर्थन
अपनी फिल्म ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ के को-स्टार्स के साथ चर्चा के दौरान सिद्धार्थ ने छात्रों की परेशानियों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाओं का असर सिर्फ छात्रों पर नहीं, बल्कि पूरे परिवार पर पड़ता है। किसी भी परिवार को ऐसी परिस्थितियों के कारण अपने बच्चे को खोना नहीं चाहिए।
सिद्धार्थ ने यह भी कहा कि कलाकारों और सार्वजनिक हस्तियों को अपनी व्यक्तिगत राय रखने का पूरा अधिकार है। किसी मुद्दे पर अपनी बात रखने के लिए उन्हें ट्रोल करना उचित नहीं है।
न्यूज18 से बातचीत में सिद्धार्थ ने देश के युवाओं की जमकर तारीफ की। उन्होंने स्वतंत्रता सेनानी चंद्रशेखर आजाद से जुड़ी चर्चित पंक्तियों का जिक्र करते हुए कहा, ‘अभी भी जिसका खून ना खौला, खून नहीं वो पानी है, जो देश के काम ना आए, वो बेकार जवानी है।’
उन्होंने आगे कहा कि यह बात हर दौर के युवाओं पर लागू होती है। युवाओं को अपनी बात खुलकर व्यक्त करनी चाहिए और इसके लिए उन्हें किसी की परमिशन या सलाह की जरूरत नहीं है।
‘मुझे बोलने के लिए किसी की परमिशन नहीं चाहिए’
सिद्धार्थ अपनी बेबाक राय और सामाजिक मुद्दों पर खुलकर बोलने के लिए जाने जाते हैं। अपनी राय को लेकर होने वाली आलोचनाओं पर उन्होंने कहा कि जब उन्होंने बोलना शुरू किया था, तब भी उन्हें किसी की अनुमति की जरूरत नहीं थी और आगे भी नहीं होगी।
उन्होंने कहा कि युवा हमेशा युवा रहेंगे और समय के साथ एक नई पीढ़ी उनकी जगह लेती रहेगी। इसलिए युवाओं को अपनी बात रखने और अपनी आवाज उठाने से पीछे नहीं हटना चाहिए।
दीया मिर्जा बोलीं- युवाओं से सीखने की जरूरत
दीया मिर्जा ने भी युवाओं की सोच और उनके साहस की सराहना की। उन्होंने कहा कि समाज को युवाओं से बहुत कुछ सीखने की जरूरत है।
अपनी बात रखने को लेकर उन्होंने कहा कि इससे नुकसान होना जरूरी नहीं है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि हम ‘नुकसान’ को किस तरह देखते हैं। अगर कोई व्यक्ति सच्चाई और प्यार के साथ अपनी बात रखता है, तो उसके पास खोने के लिए कुछ नहीं होता।

