नई दिल्ली। दुनिया के कई हिस्सों, खासकर पश्चिम एशिया में इस वक्त गहरा तनाव है। लाल सागर से लेकर होर्मुज जलडमरूमध्य तक माल ढुलाई को लेकर हाहाकार मचा हुआ है और ग्लोबल सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है। लगातार बढ़ते माल भाड़े और वैश्विक मंदी की आशंकाओं के बीच दुनिया मानकर चल रही थी कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार को तगड़ा झटका लगेगा। लेकिन इन तमाम विपरीत परिस्थितियों को धता बताते हुए भारत ने एक ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जिसने दुनियाभर के आर्थिक जानकारों को हैरान कर दिया है। जुलाई महीने के जो ताजा एक्सपोर्ट (निर्यात) और इंपोर्ट (आयात) के आंकड़े सामने आए हैं, वे इस बात की गवाही दे रहे हैं कि भयंकर अनिश्चितता के बीच भी भारतीय अर्थव्यवस्था और यहां के सामानों ने दुनियाभर के बाजारों में अपनी जबरदस्त धाक जमा ली है।
इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स सामानों ने गाड़े झंडे
कॉमर्स मिनिस्ट्री की ओर से जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, इस भयंकर लॉजिस्टिक संकट के बावजूद जुलाई महीने में भारत का मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट (मूर्त वस्तुओं का निर्यात) रिकॉर्ड 44.24 अरब डॉलर के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया है। यह आंकड़ा पिछले साल के मुकाबले 19.63 फीसदी ज्यादा है। मुख्य रूप से इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स के सामानों की भारी मांग के कारण ही भारत यह छलांग लगा पाया है। फेडरेशन ऑफ़ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन्स के अध्यक्ष एससी राल्हन के अनुसार, मुश्किल समय में यह रिकॉर्ड दिखाता है कि भारतीय व्यवसायों में किसी भी संकट से निपटने की गजब की क्षमता है। दिलचस्प बात यह है कि पश्चिम एशिया, जहां से सबसे ज्यादा संकट की खबरें आ रही हैं, वहां भी भारत के निर्यात में लगभग 8.62 फीसदी का शानदार उछाल दर्ज किया गया है।
आयात भी 9 महीने के टॉप पर, व्यापार घाटे में आया उछाल
निर्यात के साथ-साथ भारत के आयात में भी भारी तेजी देखने को मिली है। फर्टिलाइजर, पेट्रोलियम, इलेक्ट्रॉनिक्स और कोयले जैसी जरूरी चीजों की घरेलू मांग बढ़ने के चलते जुलाई में कुल आयात 76.22 बिलियन डॉलर हो गया, जो पिछले नौ महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है। चूंकि निर्यात के मुकाबले आयात कहीं ज्यादा रफ्तार से बढ़ा है, इसलिए देश का व्यापार घाटा (ट्रेड डेफिसिट) भी पिछले साल के 27.88 बिलियन डॉलर से बढ़कर 31.98 बिलियन डॉलर पर पहुंच गया है। हालांकि, कॉमर्स सेक्रेटरी राजेश अग्रवाल ने स्पष्ट किया है कि व्यापार के प्रतिशत के तौर पर यह घाटा पिछले साल के 27.3 फीसदी से घटकर अब 26.5 फीसदी रह गया है।
सोने-चांदी की चाल और नाथू ला दर्रे से फिर शुरू हुआ व्यापार
कीमती धातुओं के मोर्चे पर सरकार के उस फैसले का असर साफ़ दिखा, जिसमें मई में कस्टम ड्यूटी को 6 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया गया था। जुलाई में चांदी का आयात 66.1 फीसदी की भारी गिरावट के साथ 171.68 मिलियन डॉलर पर सिमट गया, जबकि सोने का आयात 4.77 फीसदी बढ़कर 4.16 बिलियन डॉलर रहा। इन आंकड़ों से यह भी साफ हुआ है कि अमेरिका फिलहाल भारत के सामानों का सबसे बड़ा खरीदार बना हुआ है, जबकि चीन से भारत सबसे ज्यादा माल आयात कर रहा है। इसके साथ ही, व्यापारिक मोर्चे पर एक और बड़ी खुशखबरी यह है कि 1 अगस्त 2026 से सिक्किम के नाथू ला रूट के जरिए सीमा व्यापार छह साल के लंबे अंतराल के बाद फिर से शुरू हो गया है, जिससे आने वाले समय में आर्थिक संबंधों और क्रॉस-बॉर्डर ट्रेड को और अधिक मजबूती मिलेगी।
दुनिया में मंदी की आहट, लाल सागर में भारी संकट… फिर भी भारत ने कर दिया कमाल, एक्सपोर्ट डेटा ने सबको चौंकाया

