वॉशिंगटन, एजेंसी। 28 फरवरी को ईरान के तत्कालीन सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के बाद युद्ध में तेहरान के भविष्य को लेकर सवाल उठने लगे थे। अमेरिका और इजराइल ने तुरंत जंग खत्म कर ईरान में नए नेता तलाशने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी थी। इसको लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बयान भी दिया था, जिसमें उनका कहना था कि मैंने अपने मन में नेता का चयन कर लिया है। जल्द ही आप सबको बताया जाएगा, लेकिन युद्ध के 34वें दिन स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है।
अमेरिका अब ईरान को आजाद नहीं कराना चाहता है। वो बमबारी के जरिए ईरान को पाषाण काल में भेजना चाहता है। यह इसलिए, क्योंकि जंग में ईरान ने अमेरिका को घुटनों पर ला दिया है। ट्र्ंप के धुर विरोधी नेता और और कैलिफॉर्निया के गवर्नर गेविन न्यूजॉम का कहना है कि ट्रंप के पास युद्ध से बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं है। पिता की हत्या के करीब 10 दिन बाद सुप्रीम लीडर नियुक्त हुए मुज्तबा ने अपने 5 फैसले से दुनिया के सुपरपावर को सरेंडर मोड में ला दिया है। कैसे, आइए विस्तार से समझते हैं…
घुटनों पर कैसे आ गया अमेरिका?
1- युद्ध के 34वें दिन डोनाल्ड ट्रंप को देश के सामने आना पड़ा है। देश को संबोधित करते हुए ट्रंप ने युद्ध को जरूरी बताया है। ट्रंप ने लोगों से कहा कि युद्ध में अगर हम नहीं उतरते तो भविष्य सुरक्षित नहीं था।
2- राष्ट्रपति ट्रंप ने एक बयान में होर्मुज में एंटर नहीं करने की बात कही है। ट्रंप ने कहा कि होर्मुज से अमेरिका का कोई लेना देना नहीं है। उधर, समझौते के तहत जेडी वेंस ने सबसे पहले होर्मुज खोलने की बात कही है।
3- ट्रंप ने ईरान में अब सिर्फ 3 हफ्ते तक युद्ध करने की बात कही है। पहले वे तख्तापलट के मकसद से ईरान में आए थे। ट्रंप ने अब ईरान को पाषाण युग में भेजने की बात कही है। इसे जानकार ट्रंप की खिज बता रहे हैं।
मुज्तबा के 5 फैसले को पढ़िए
1- सुप्रीम लीडर मुज्तबा ने 6 दिन के जंग में ही होर्मुज बंद करने का फैसला कर लिया। जून 2025 में जब अमेरिका ने ईरान पर हमला किया था, तब 12 दिन के जंग में भी होर्मुज को ब्लॉक नहीं किया गया था। इस बार मुज्तबा ने पहले ही होर्मुज में नाकेबंदी कर दी, जिससे पूरी दुनिया में उथल-पुथल मच गई।
2- मुज्तबा ने इस बार वीडियो बयान जारी नहीं किया। सुप्रीम लीडर की तरफ से सिर्फ लिखित बयान सामने आए। दरअसल, मुज्तबा जानते थे कि अगर वे वीडियो जारी करेंगे, तो उनके लोकेशन को ट्रेस किया जाएगा। ऐसे में उनकी जान भी जा सकती है। इजराइल और अमेरिका के उकसाने पर भी उन्होंने सिर्फ लिखित आदेश जारी किए।
3- ईरान में सेना को टुकड़ों में बांट दिया गया है। छोटे-छोटे स्तर पर भी सेना के जवान खुद हमले को लेकर फैसला कर सकते हैं। यह इसलिए किया गया है कि ताकि अमेरिका तुरंत ईरान पर कब्जा न कर सके। ईरान ने इस फैसले से जंग को लंबा खिंच दिया है। यह अमेरिका के लिए सिरदर्द बना हुआ है।
4- शुरुआत में ब्रिटेन ने जंग में इस्तेमाल करने के लिए अमेरिका को चागोस द्वीप पर स्थित बेस को देने का फैसला किया था। ईरान ने वहां पर अटैक कर दिया। इसके जरिए ईरान ने ब्रिटेन को यह संदेश दिया कि हम दूर तक भी लड़ाई कर सकते हैं। ईरान के पास ब्रिटेन पर हमला करने वालें मिसाइलें भी मौजूद हैं। इसके बाद ब्रिटेन ने जंग से खुद को दूर कर लिया।
5- ईरान का कम्युनिकेशन सेटअप बेहतरीन तरीके से व्यवस्थित किया गया है। सभी दूतावास को एक्टिव किया गया है। आधिकारिक बयान तुरंत जारी किए जा रहे हैं, जिससे युद्ध में अमेरिका और इजराइल का प्रोपगंडा नहीं चल पा रहा है।
मुज्तबा खामेनेई के वो 5 फैसले, जिससे जंग में घुटनों पर आ गया अमेरिका…होर्मुज से हटा पीछे

