नई दिल्ली, एजेंसी। ब्रिटेन समेत कई पश्चिमी देश स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर परेशान हैं। वहां उनके कई जहाज फंसे हैं। एक ओर जहां पश्चिमी देश ईरान के कदम से टेंशन में हैं तो वहीं इधर नई दिल्ली में भारत और रूस के बीच अहम डील होने जा रही है। ये समझौते रूस के उप प्रधानमंत्री डेनिस मांतुरोव की नई दिल्ली यात्रा के दौरान होने जा रही है। मांतुरोव रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और कई अन्य द्विपक्षीय मुद्दों पर उच्च-स्तरीय चर्चाओं के लिए गुरुवार सुबह नई दिल्ली पहुंचे।
अपनी यात्रा के दौरान वह विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर के साथ वार्ता करेंगे और अन्य द्विपक्षीय बैठकों में हिस्सा लेंगे। अधिकारियों के अनुसार, इस दौरे का मुख्य जोर द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर रहने की उम्मीद है। विशेष रूप से सुरक्षा और रक्षा सहयोग के क्षेत्रों में।
डोभाल-सीतारमण से भी करेंगे मुलाकात
विदेश मंत्रालय के अनुसार, मांतुरोव अपनी यात्रा के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से भी मुलाकात करेंगे। उम्मीद है कि चर्चाएं रक्षा, सुरक्षा, ऊर्जा और व्यापार जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग पर केंद्रित रहेंगी। मांतुरोव के दौरे से पहले, विदेश सचिव विक्रम मिस्री और रूस के उप विदेश मंत्री आंद्रेई रुडेंको ने 30 मार्च को नई दिल्ली में मुलाकात की। दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों की मौजूदा स्थिति की समीक्षा की और क्षेत्रीय तथा वैश्विक घटनाक्रमों पर विचारों का आदान-प्रदान किया।
आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर जोर
दोनों पक्षों ने पिछले साल दिसंबर में नई दिल्ली में हुए भारत-रूस शिखर सम्मेलन के दौरान लिए गए फैसलों को लागू करने में हुई प्रगति का भी जायजा लिया। इस शिखर सम्मेलन का मुख्य ज़ोर दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने पर था।
ट्रंप की कोशिश नाकाम
अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत और रूस के बीच दरार पैदा करने की कोशिश की, लेकिन वो कामयाब नहीं हुए थे। उन्होंने रूस से तेल खरीदने पर भारत पर एक्स्ट्रा टैरिफ लगा दिया था। इस कदम का मकसद भारत को रूसी ऊर्जा क्षेत्र से दूर करना था, जिससे अमेरिकी नीति निर्माताओं के अनुसार, यूक्रेन संकट को सुलझाने में मदद मिलती।
उधर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर पश्चिमी देश परेशान, इधर दिल्ली में भारत और रूस के बीच हो रहीं अहम डील

