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30 Aug 2025, Sat

यूनुस देखते रह गए, सेना के कंट्रोल में होगा बांग्लादेश का चुनाव, आयोग का प्लान तैयार

ढाका, एजेंसी। बांग्लादेश में अगले साल फरवरी में आम चुनाव होने वाले हैं। इसकी घोषणा हाल ही में बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुखिया प्रोफेसर मोहम्मद यूनुस ने की थी। इस बीच खबर है कि चुनाव के दौरान कानून व्यवस्था मजबूत रखने के लिए चुनाव आयोग ने एक नया प्लान तैयार किया है। इस बार सेना, नौसेना और वायुसेना को भी कानून व्यवस्था बलों में शामिल करने का प्रस्ताव तैयार किया है।
सोमवार को हुई EC बैठक में RPO (Representation of the People Order) में बदलाव का प्रस्ताव मंजूर किया गया। अगर यह प्रस्ताव कानून बन गया, तो इन बलों को चुनाव में जिम्मेदारी देने के लिए अलग आदेश की जरूरत नहीं होगी। सेना के जवान भी पुलिस की तरह मतदान केंद्रों पर ड्यूटी कर पाएंगे और बिना वारंट गिरफ्तारी कर सकेंगे।
Prothomalo की एक खबर के मुताबिक 2001 से 2008 तक RPO में सेना कानून-व्यवस्था बल की परिभाषा में थी, लेकिन 2009 में यह हटा दिया गया। अभी की परिभाषा में पुलिस, RAB, आंसर, BGB, कोस्ट गार्ड वगैरह आते हैं। RPO की धारा 87 के अनुसार, कानून-व्यवस्था बल का कोई भी सदस्य (चाहे पुलिस न हो) चुनाव से जुड़े कुछ अपराधों के लिए या शांति बनाए रखने के लिए मतदान केंद्र और उसके 400 गज के दायरे में बिना वारंट गिरफ्तारी कर सकता है।
अगर सेना को परिभाषा में शामिल कर दिया गया, तो उन्हें भी ये अधिकार मिलेंगे। अभी तक चुनाव में सेना को सिर्फ स्ट्राइकिंग फोर्स (तैनात लेकिन मतदान केंद्र के अंदर काम नहीं) के रूप में बुलाया जाता है। वे जरूरत पड़ने पर गश्त और कार्रवाई करते हैं, लेकिन मतदान केंद्र पर ड्यूटी नहीं करते।
यूनुस को ये प्लान क्यों रास नहीं आएगा?
यूनुस बार बार इस बात पर जोर देते रहे हैं चुनाव सम्मानजनक और लोकतांत्रिक तरीके से होना चाहिए न कि सेना की ताकत से। उन्होंने कहा है कि सेना देश की रक्षा के लिए है, चुनी हुई सरकार ही राष्ट्र का भविष्य तय कर सकती है। दूसरा ये कि सेना को कानून-व्यवस्था के कामों में जैसे मतदान केंद्रों पर ड्यूटी और बिना वारंट गिरफ्तारी की जिम्मेदारी अगर दी जाए, तो ये सैन्य हस्तक्षेप में बढ़ोतरी का संकेत है।
इस प्लान पर जानकारों की राय क्या है?
Prothomalo में मेजर जनरल (रिटा।) फ़ज़ले इलाही अकबर का बयान छपा है, जिसमें उन्होंने कहा है कि सेना को सिर्फ स्ट्राइकिंग फोर्स रखने से संसाधन और पैसे की बर्बादी है। उन्हें बाकी बलों के साथ मिलकर चुनाव में समान माहौल बनाने कि जिम्मेदारी देनी चाहिए। अर्थशास्त्री देबप्रिया भट्टाचार्य ने कहा कि पुलिस की क्षमता और मनोबल अभी कम है, और कानून-व्यवस्था की स्थिति अच्छी नहीं है। अच्छे चुनाव के लिए सेना की बड़ी और असरदार भूमिका जरूरी है। वे चाहते हैं कि सेना चुनाव से 3 महीने पहले अवैध हथियार बरामद करे और चुनाव के 10 दिन बाद तक मैदान में रहे।

By Aryavartkranti Bureau

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