नई दिल्ली। देश में खाने-पीने की चीजों की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर सरकार ने निगरानी और कार्रवाई तेज कर दी है। खाद्य पदार्थों में मिलावट, खराब हाइजीन, गलत लेबलिंग और एक्सपायरी डेट से छेड़छाड़ जैसी शिकायतों के बीच फूड सेफ्टी अथॉरिटीज की ओर से जांच और छापेमारी का दायरा बढ़ाया जा रहा है।
हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, हर साल जांच किए जाने वाले खाद्य नमूनों में करीब 20 फीसदी सैंपल असुरक्षित, घटिया या गलत तरीके से लेबल किए हुए पाए जाते हैं। पिछले तीन वर्षों में करीब 8,000 फूड बिजनेस लाइसेंस रद्द किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
कहीं मिलावट, कहीं गलत लेबलिंग
फूड सेफ्टी अधिकारियों की कार्रवाई में कई तरह की गड़बड़ियां सामने आ रही हैं। इनमें खराब साफ-सफाई, खाद्य पदार्थों का गलत तरीके से स्टोर किया जाना, एक्सपायर्ड उत्पाद और पैकेजिंग पर गलत जानकारी जैसी शिकायतें शामिल हैं।
मुंबई में हाल ही में एक कथित अवैध ऑपरेशन का खुलासा हुआ, जहां ब्रांडेड खाद्य उत्पादों की एक्सपायरी डेट और न्यूट्रिशन लेबल में बदलाव किया जा रहा था। अधिकारियों ने छापेमारी के दौरान ऐसे उत्पाद, लेबल बदलने में इस्तेमाल होने वाले केमिकल और प्रिंटिंग उपकरण बरामद किए।
यह मामला इसलिए भी गंभीर माना गया क्योंकि कथित तौर पर कुछ उत्पादों को विदेशी बाजारों के लिए तैयार किया जा रहा था।
पैकेज्ड फूड पर भी बढ़ी नजर
सरकार और नियामक संस्थाओं का फोकस केवल रेस्टोरेंट और स्थानीय दुकानों तक सीमित नहीं है। पैकेज्ड फूड की लेबलिंग और उसमें मौजूद शुगर, नमक और सैचुरेटेड फैट की जानकारी को लेकर भी बहस तेज हो गई है।
FSSAI की ओर से पैकेज्ड खाद्य पदार्थों पर फ्रंट-ऑफ-पैक चेतावनी लेबल से जुड़ा प्रस्ताव चर्चा में है। इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं को यह समझने में मदद करना है कि किसी उत्पाद में पोषण संबंधी जोखिम कितना है। हालांकि, प्रस्ताव को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञों और खाद्य उद्योग के बीच मतभेद भी हैं। इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट में 10 सितंबर को सुनवाई होनी है।
क्विक कॉमर्स पर भी नजर
खाद्य सुरक्षा की निगरानी अब ऑनलाइन और क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म तक भी पहुंच रही है। ऑनलाइन खरीदे जाने वाले पैकेज्ड फूड के मामले में उपभोक्ताओं को उत्पाद की जरूरी जानकारी, जैसे एक्सपायरी और लेबलिंग से जुड़ी जानकारी स्पष्ट रूप से उपलब्ध कराने पर जोर बढ़ रहा है।
इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि ग्राहक सामान खरीदने से पहले उसके बारे में जरूरी जानकारी देख सकें।
FSSAI के नियमों में भी बदलाव
इस साल FSSAI ने खाद्य कारोबारियों के लिए लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन व्यवस्था में भी कई बदलाव किए हैं। नए नियमों के तहत FSSAI लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन को perpetual validity देने का प्रावधान किया गया है, यानी इन्हें नियमित रूप से रिन्यू कराने की जरूरत नहीं होगी, हालांकि नियमों का पालन जरूरी रहेगा।
वहीं, 1 अप्रैल 2026 से फूड बिजनेस की श्रेणी तय करने के लिए टर्नओवर की सीमा भी बदली गई है। अब ₹1.5 करोड़ तक के टर्नओवर वाले कारोबार के लिए रजिस्ट्रेशन, ₹1.5 करोड़ से ₹50 करोड़ तक के लिए स्टेट लाइसेंस और ₹50 करोड़ से अधिक के कारोबार के लिए सेंट्रल लाइसेंस का प्रावधान है।
आम ग्राहक के लिए क्या बदलेगा?
फूड सेफ्टी पर बढ़ती सख्ती का सीधा असर आम ग्राहक पर पड़ सकता है। अगर जांच और निगरानी प्रभावी तरीके से लागू होती है, तो मिलावट, गलत लेबलिंग और असुरक्षित खाद्य पदार्थों पर रोक लगाने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, उपभोक्ताओं के लिए भी जरूरी है कि वे खाने-पीने की चीजें खरीदते समय मैन्युफैक्चरिंग डेट, एक्सपायरी डेट, FSSAI लाइसेंस नंबर, पैकेजिंग और लेबल पर दी गई पोषण संबंधी जानकारी जरूर जांचें।
आखिर क्यों जरूरी है Food Safety पर सख्ती?
खाद्य सुरक्षा केवल मिलावट रोकने का मुद्दा नहीं है। इसका सीधा संबंध लोगों के स्वास्थ्य से है। ऐसे में नियामकों के सामने चुनौती यह है कि वे एक तरफ कारोबारियों के लिए नियमों को सरल बनाएं और दूसरी तरफ खाद्य गुणवत्ता, स्वच्छता और उपभोक्ता सुरक्षा से किसी तरह का समझौता न होने दें।
यही वजह है कि आने वाले दिनों में रेस्टोरेंट, पैकेज्ड फूड, क्विक-कॉमर्स और खाद्य कारोबारियों पर निगरानी और ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकती है।


