नई दिल्ली, एजेंसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को दिल्ली के राय पिथौरा सांस्कृतिक परिसर में भगवान बुद्ध से जुड़े पवित्र पिपरहवा अवशेषों की ग्रैंड इंटरनेशनल एग्जीबिशन का उद्घाटन किया। प्रदर्शनी में भगवान बुद्ध से जुड़ी दुर्लभ और पवित्र धरोहरों को जनता के सामने प्रदर्शित किया गया है।
प्रदर्शनी के उद्घाटन के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि 2026 के शुरुआत में ही ये शुभ उत्सव बहुत प्रेरणादायी है और मेरे लिए सौभाग्य की बात है कि 2026 का ये मेरा पहला सार्वजनिक कार्यक्रम है, जब भगवान बुद्ध की चरणों से शुरू हो रहा है। मेरी कामना है कि भगवान बुद्ध के आशीर्वाद से 2026 दुनिया के लिए शांति, समृद्धि और सद्भाव का नया दौर लेकर आए।
जिस स्थान पर ये प्रदर्शनी लगी है वो भी अपने आप में विशेष है। किला राय पिथौरा का ये स्थान भारत के गौरवशाली इतिहास की यशभूमि है। सवा सौ साल के इंतजार के बाद भारत की विरासत लौटी है, भारत की धरोहर लौटी है। आज से भारतीय जनमानस, भगवान बुद्ध के इन पवित्र अवशेषों के दर्शन कर पाएगा, भगवान बुद्ध के आशीर्वाद ले पाएगा। मैं इस शुभ अवसर पर यहां उपस्थित सभी अतिथियों का स्वागत और अभिनंदन करता हूं।
पीएम मोदी ने कहा कि भगवान बुद्ध का मेरे जीवन पर गहरा असर पड़ा। भगवान बुद्ध सबके हैं सबको जोड़ते हैं। मैं खुद को बहुत भाग्यशाली समझता हूं, क्योंकि भगवान बुद्ध का मेरे जीवन में बहुत ही गहरा स्थान रहा है। मेरा जन्म जिस वडनगर में हुआ, वो बौद्ध शिक्षा का बहुत बड़ा केंद्र था। जिस भूमि पर भगवान बुद्ध ने प्रथम उपदेश दिए, वो सारनाथ आज मेरी कर्मभूमि है।
आज, पूरे देश में एक बुद्धिस्ट सर्किट डेवलप किया जा रहा है ताकि भारत में सभी बौद्ध तीर्थ स्थलों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित की जा सके और दुनिया भर के तीर्थयात्रियों को आस्था और आध्यात्मिकता का एक समृद्ध अनुभव मिल सके।
भारत बुद्ध की परंपरा का जीवंत वाहक
भारत केवल भगवान बुद्ध के पावन अवशेषों का संरक्षक नहीं है। बल्कि उनकी परंपरा का जीवंत वाहक भी है। पिपरहवा, वैशाली, देवनी मोरी और नागार्जुन कोंडा जैसे प्राप्त भगवान बुद्ध से जुड़े अवशेष बुद्ध के संदेश की जीवित उपस्थिति है।
भगवान बुद्ध का ज्ञान, उनका दिखाया मार्ग पूरी मानवता का है। ये भाव हमने बीते कुछ महीनों में बार-बार अनुभव किया। बीते कुछ महीनों में भगवान बुद्ध के पावन अवशेष जिस भी देश में गए, वहां आस्था और श्रद्धा का ज्वार उमड़ आया।
गुलामी हमारी विरासत को दबा देती
भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष को अपने बीच पाकर हम सभी धन्य हैं। इनका भारत से बाहर जाना और लौटकर फिर भारत आना, ये दोनों ही पड़ाव अपनेआप में बहुत बड़ा सबक है। सबक ये है कि गुलामी कोई राजनीतिक और आर्थिक नहीं होती, गुलामी हमारी विरासत को भी दबाह कर देती है। भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष के साथ भी यही हुआ।
गुलामी के कालखंड में इन्हें भारत से छीना गया। तब से करीब सवा सौ साल तक ये देश से बाहर ही रहे हैं। इसलिए उन्होंन इन पवित्र अवशेषों को अंतर्राष्ट्रीय बाजार में निलाम करने का प्रयास किया। मैं गोदरेज ग्रुप को धन्यवाद देता हूं, उनकी मदद से ही बुद्ध के अवशेष उनकी मातृभूमि में वापस आए हैं।
‘125 साल के इंतजार के बाद लौटी भारत की विरासत’, बुद्ध अवशेष प्रदर्शनी के उद्घाटन पर बोले पीएम मोदी

