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12 Jul 2025, Sat

ईरान-इजराइल की जंग खत्म, लेकिन असली तैयारी अब इस देश में हुई शुरू

तेल अवीव, एजेंसी। ईरान और इजराइल के बीच सिर्फ 12 दिन की जंग चली थी, लेकिन उसका असर हजारों किलोमीटर दूर ताइवान तक दिख रहा है। इजराइल की रणनीति, अमेरिका का साथ और ईरान की जवाबी कार्रवाई, इन सबको ताइवान ने बड़े ध्यान से देखा और समझा। अब वही ताइवान चीन से निपटने के लिए हर मोर्चे पर खुद को तैयार कर रहा है।
इसका एक उद्हारण तो ताइवान के अब तक के सबसे बड़े सैन्य अभ्यास “हान कुआंग ड्रिल्स” है, जो इस हफ्ते से शुरु हो चुका है। इसमें 22,000 रिजर्व सैनिक शामिल हैं। साइबर अटैक, मिसाइल हमले और जमीनी लड़ाई, हर स्थिति को ध्यान में रखकर अभ्यास हो रहा है। इसका मकसद है चीन जैसे बड़े और ताकतवर दुश्मन से निपटने की तैयारी।
ईरान-इजराइल युद्ध से क्या सीखा?
13 जून से 24 जून तक चले ईरान-इजराइल युद्ध में इजराइल ने पहले ही फेज़ में ईरान की एयर डिफेंस को नुकसान पहुंचा दिया। इजराइल ने सटीक खुफिया जानकारी के दम पर सैकड़ों एयरस्ट्राइक किए, तो ईरान ने 550 से ज्यादा मिसाइलें और हजार से ज्यादा ड्रोन दागे। अमेरिका ने नौंवे दिन से मोर्चा संभाल लिया और ईरान के तीन न्यूक्लियर ठिकानों पर हमला किया। इस पूरे घटनाक्रम से ताइवान को ये सीख मिली कि वक्त से पहले जानकारी, साइबर सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग—तीनों मिलकर दुश्मन को कमजोर कर सकते हैं।
चीन से मुकाबले की अलग रणनीति
चीन की सेना हर मामले में ताइवान से बड़ी है। लेकिन ताइवान अब असिमेट्रिक डिफेंस यानी स्मार्ट और तेज तकनीकों पर फोकस कर रहा है। जैसे एंटी-ड्रोन सिस्टम, साइबर हमलों के बीच भी कमांड बनाए रखने की योजना, और अमेरिकी M1A2T अब्राम्स टैंक का प्रदर्शन, जो ताइवान की नई ताकत बन रहे हैं।
अमेरिका से रिश्ते और भरोसे की नींव
ताइवान को समझ आ गया है कि खुद को मज़बूत किए बिना कोई साथ नहीं देगा। इसलिए उसने अमेरिका के साथ सैन्य ट्रेनिंग, खुफिया जानकारी साझा करने और फॉरेन मिलिट्री फाइनेंसिंग जैसे समझौते तेज किए हैं। ताइवानी सैनिक अमेरिका में ट्रेनिंग ले रहे हैं और अमेरिकी विशेषज्ञ ताइवान में आकर ट्रेनिंग दे रहे हैं।
सिविल डिफेंस की तैयारी भी जोरों पर
इजराइल में लोगों को पता है कि मिसाइल अटैक के समय कहां जाना है, कैसे सतर्क रहना है। वहीं ताइवान अब अपने नए सरकारी और पब्लिक भवनों में बम-रोधी शेल्टर बना रहा है। पुराने बिल्डिंगों को भी फ्यूचर में मजबूत बनाने की योजना है। साथ ही, ट्रेन स्टेशनों और मेट्रो में भी सेफ स्पेस बनाए जा रहे हैं।
मानसिक मजबूती और मेडिकल तैयारी
ताइवान अब अपने नागरिकों को मानसिक रूप से भी तैयार कर रहा है। मेडिकल इमरजेंसी, रेस्क्यू सिस्टम, और ट्रॉमा थैरेपी जैसे पहलुओं पर फोकस किया जा रहा है। ताइवान के विशेषज्ञ इजराइल में जाकर सीख रहे हैं कि जंग जैसी स्थिति में आम लोग कैसे शांत और तैयार रह सकते हैं।

By Aryavartkranti Bureau

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