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26 Feb 2026, Thu

BLO पर दबाब-अल्पसंख्यकों के वोट काटे जाने की साजिश… SIR को लेकर अखिलेश यादव ने सुप्रीम कोर्ट से लगाई गुहार

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में इन दिनों स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR को लेकर विपक्ष की तरफ से चुनाव आयोग और बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। डिंपल यादव के बाद अब अखिलेश यादव ने भी चुनाव आयोग पर हमला बोला है। उन्होंने सीधे तौर पर कहा कि आयोग और भाजपा दोनों मिले हुए हैं। ये दोनों ही मिलकर लोगों के नाम काटने की तैयारी है। अखिलेश ने सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर तत्काल संज्ञान लेने की अपील भी की है।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय से हमारी अपील है कि वह इस बेहद गंभीर मामले पर तत्काल संज्ञान ले, क्योंकि अब किसी और संस्था से न्याय की उम्मीद बची नहीं है।लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए सर्वोच्च न्यायालय का हस्तक्षेप आज सबसे ज़्यादा ज़रूरी हो गया है।
अखिलेश ने आगे लिखा कि SIR में फ़ार्म 7 के दुरुपयोग को तुरंत रोका जाए और हर वोटर के मत देने के संवैधानिक अधिकार की रक्षा की जाए। BLO से ज़बरदस्ती कर रहे अपराधियों के विरुध्द FIR लिखवाई जाए और फ़ास्ट ट्रैक सुनवाई हो। जब तक वैध व्यवस्था न बन जाए, फार्म 7 का इस्तेमाल प्रतिबंधित किया जाए और अब तक जो फार्म 7 जमा हुए हैं, उन सबको रद्द-निरस्त किया जाए। दावा-आपत्ति की गतिविधियों पर तत्काल रोक लगाई जाए।
षड्यंत्र के पीछे कौन उसकी होनी चाहिए जांच
अखिलेश ने लिखा कि देश की जनता के वोट काटने के षड्यंत्र के पीछे कौन सी देश विरोधी ताकतें सक्रिय हैं, इसकी न्यायिक जांच हो। देश के ईमानदार पत्रकार और अधिकारी सामने आए और देश विरोधी ताकतों से लड़ने में हमारा साथ दें। पीडीए प्रहरियों से अपील है कि वो हर वैध वोट बनाने-बचाने के कार्य में पूरी मुस्तैदी से लगे रहें। भाजपाइयों की धांधली को उनकी होनेवाली हार की हताशा मानें और भाजपाइयों के घपलों के सबूत इकट्ठा करके उनके खिलाफ FIR की तैयारी करें। सच तो ये है कि जैसे-जैसे पीडीए परिवार बढ़ रहा है, वैसे-वैसे भाजपाई डर रहा है।
क्या है मामला जिसका अखिलेश ने शेयर किया वीडियो
चुनाव आयोग की तरफ से बीएलओ के तौर पर प्रदेशभर में कर्मचारी काम कर रहे हैं। इन्हीं में से एक बीएलओ अश्वनी कुमार ने बीजेपी पदाधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उन पर दबाव बनाया जा रहा है कि समुदाय विशेष के लोगों के नाम काटे जाएं। बीएलओ के मना करने पर मारपीट और गाली गलौज भी की गई। हालांकि पुलिस इस मामले पर अलग ही कहानी बता रही है। पुलिस का कहना है कि दोनों पक्षों में फॉर्म जमा करने को लेकर गलतफहमी थी। इसी वजह से विवाद हुआ था।

By Aryavartkranti Bureau

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