केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को नरेंद्र मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का आम बजट पेश किया। इस बजट में अंतरिक्ष विभाग को 13,705.60 करोड़ रुपये आवंटित किये गए हैं, ताकि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) नए रॉकेट और अंतरिक्ष स्टेशन बनाने व मानव अंतरिक्ष उड़ान के सपने को पूरा कर सके।
चालू वित्त वर्ष में अंतरिक्ष विभाग को 13,705 करोड़ रुपये मिलेंगे, जो पिछले साल के 13,416 करोड़ रुपये से थोड़ा ज्यादा है। पिछले साल विभाग को कुल 12,448.60 करोड़ रुपये मिले थे।
2026-27 के बजट में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के लिए 10,397 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इसका उपयोग इसरो के प्रमुख केंद्रों जैसे विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र, द्रव प्रणोदन प्रणाली केंद्र, इसरो प्रणोदन परिसर और यूआर राव उपग्रह केंद्र की गतिविधियों में किया जाएगा।
लॉन्च व्हीकल और उपग्रह परियोजनाओं के लिए बजट आवंटन
इस सहायता में रॉकेट (लॉन्च वाहन) परियोजनाएं और उपग्रह परियोजनाएं शामिल हैं, जिनमें विकास और संचालन से जुड़ी योजनाएं और इन-स्पेस की योजनाएं भी शामिल हैं। कुल बजट में से 7,329.70 करोड़ रुपये सामान्य खर्च के लिए और 6,375.90 करोड़ रुपये पूंजीगत खर्च के लिए रखे गए हैं, जो पिछले साल की संशोधित पूंजी योजना से लगभग 1,066 करोड़ रुपये ज्यादा हैं। इसरो इस वर्ष गगनयान मिशन की मानव रहित उड़ानें करेगा और अगली पीढ़ी का लॉन्च व्हीकल भी बना रहा है, ताकि भारी पेलोड को अंतरिक्ष कक्षा में छोड़ा जा सके।
निजी क्षेत्र की भागीदारी को मिलेगा बढ़ावा
भारतीय अंतरिक्ष संघ के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल एके भट्ट (सेवानिवृत्त) ने कहा, इसरो के आवंटन में वृद्धि एक अहम संकेत है, जो लॉन्च व्हीकल, सैटेलाइट और वैज्ञानिक मिशनों में इसरो के नेतृत्व वाले कार्यक्रमों में निजी क्षेत्र की गहरी भागीदारी को बढ़ावा देने में मदद करेगी।
सरकार ने बजट में अंतरिक्ष विभाग को आवंटित किए 13 हजार 705 करोड़, इन सपनों को पूरा कर सकेगा इसरो

