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21 Feb 2026, Sat

भारतवंशी नील कात्याल कौन?: जिन्होंने पलट दिया ट्रंप टैरिफ का पूरा खेल, बने ऐतिहासिक फैसले का चेहरा

वॉशिंगटन, एजेंसी। अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए व्यापक वैश्विक टैरिफ को असंवैधानिक करार देकर बड़ा फैसला सुनाया। इस ऐतिहासिक फैसले के केंद्र में एक भारतीय मूल का नाम उभरा, नील कात्याल। नील ने ही अदालत में ट्रंप के उस कदम को चुनौती दी, जिसमें 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट यानी आईईईपीए का इस्तेमाल कर लगभग सभी व्यापारिक साझेदार देशों पर टैरिफ लगाए गए थे। नील कात्याल ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि राष्ट्रपति ने आपात आर्थिक शक्तियों का गलत इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि टैरिफ दरअसल टैक्स होते हैं और टैक्स लगाने का अधिकार केवल अमेरिकी कांग्रेस को है, न कि राष्ट्रपति को। कात्याल ने इन टैरिफ को अन्यायपूर्ण और असंवैधानिक टैक्स बताया। सुप्रीम कोर्ट ने छह-तीन के बहुमत से कहा कि संविधान के तहत टैक्स लगाने की शक्ति कांग्रेस के पास है।
यह मामला छोटे अमेरिकी कारोबारियों द्वारा दायर किया गया था, जिन्हें लगा कि टैरिफ से उनका व्यापार प्रभावित हो रहा है। ट्रंप प्रशासन ने टैरिफ को राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक दबाव का जरूरी कदम बताया था। लेकिन अदालत ने साफ कहा कि आपात शक्तियों के नाम पर राष्ट्रपति व्यापक टैक्स नहीं लगा सकते। नील कात्याल का जन्म शिकागो में भारतीय प्रवासी माता-पिता के घर हुआ। उनके पिता इंजीनियर और माता डॉक्टर थीं। उन्होंने डार्टमाउथ कॉलेज और येल लॉ स्कूल से पढ़ाई की। वह अमेरिका के कार्यवाहक सॉलिसिटर जनरल रह चुके हैं और सुप्रीम कोर्ट में 50 से अधिक मामलों में पैरवी कर चुके हैं। वह कई बड़े संवैधानिक मामलों में अहम भूमिका निभा चुके हैं।

By Aryavartkranti Bureau

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