नेपाल बाढ़ में 734 मौतें, 3,000 लापता: 898 कर्मचारी अलग-अलग सुरंगों में फंसे

काठमाण्डू। नेपाल-चीन सीमा पर आई विनाशकारी बाढ़ के बाद बचाव अभियान का आज 5वां दिन है। बचावकर्मी मलबे और गाद के बीच जिंदा बचे लोगों की तलाश में जुटे हुए हैं। इस बीच मौतों का आंकड़ा बढ़कर 734 हो गया है, जबकि 3,000 से अधिक लोग अभी भी लापता हैं। नेपाल में 675 लोग मारे गए हैं और 2,498 लापता हैं। वहीं, तिब्बत के ग्यिरोंग में 16 मौतें हुई हैं और 546 लोग अभी भी लापता है।
नेपाल में अलग-अलग 11 जलविद्युत परियोजनाओं में काम कर रहे करीब 898 कर्मचारी लापता हैं, जिनमें कुछ भारतीय भी हैं। इनमें से 361 को बचाया जा चुका है।
ऊर्जा, जल संसाधन और सिंचाई मंत्री बिराज भक्त श्रेष्ठ ने बताया कि त्रिशूली-3ए परियोजना की सुरंग में चल रहे बचाव अभियान में कुछ सफलता मिली है।
अपर त्रिशुली 1 में कम से कम 322, अपर त्रिशुली 3बी में 122, अपर त्रिशुली 3ए में 43 और रसुवागढ़ी परियोजना में 44 लोग लापता हैं।
भारत ने बीते दिन तीसरी राहत उड़ान भेजी, जिसमें चिकित्सा और सुरंग विशेषज्ञों की 11 सदस्यीय विशेष तकनीकी टीम थी।
काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने बताया कि टीम ने दिन भर प्रभावित जलविद्युत सुरंगों का जायजा लिया।
दूतावास ने कहा, भारत की एक विशेष तकनीकी टीम ने जलविद्युत सुरंगों का जायजा लिया, जिससे फंसे हुए लोगों की खोज और बचाव में मदद मिलेगी।
भारत से आज चौथा विमान काठमांडू के लिए रवाना होगा।
अपर त्रिशूली 1 में इंजीनियर अजय चौधरी भी सुरक्षित बाहर निकलने वालों में शामिल थे।
उन्होंने बताया, जैसे ही हमने पानी की विशाल लहर को अपनी ओर आते देखा, हम भागने लगे। पास की पहाड़ियों तक पहुंचने में हमें लगभग 40 सेकंड लगे होंगे। हमारे जैसे कई मजदूर बांध निर्माण स्थल से भाग निकले। लगभग 150-200 मजदूर नहीं निकल पाए। सुरंग का प्रवेश द्वार बंद हो गया और दीवारें गिर गईं। वहां नेपाल, भारत, चीन और जर्मनी के लोग हैं।
नेपाल सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल राजा राम बसनेट ने बताया कि 15 हेलीकॉप्टर और कम से कम 84 प्रशिक्षित कर्मियों को तैनात किया गया है, साथ ही सैकड़ों बचावकर्मी भी उपलब्ध हैं।
ऊर्जा मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि एक चीनी कंपनी भी बचाव कार्य में शामिल होने वाली है।
नेपाल ने जटिल सुरंग बचाव कार्यों, जीवित बचे लोगों का पता लगाने की तकनीक, फोरेंसिक पहचान और डीएनए परीक्षण के लिए पड़ोसी देशों से विशेष सहायता मांगी है।
एलन मस्क की सैटेलाइट इंटरनेट नेटवर्क कंपनी स्टारलिंक ने कहा कि मंजूरी मिलते ही वह नेपाली सरकार और मानवीय संगठनों को सहायता देने के लिए मुफ्त सेवा प्रदान करने के लिए तैयार है।
कंपनी ने कहा, सैटेलाइट संचार बचाव दल को खोज में समन्वय स्थापित करने, चिकित्सा दल को घायलों का इलाज करने और परिवारों को लापता लोगों से संपर्क करने में मदद कर सकता है, खासकर सड़कों, पुलों और सेलुलर नेटवर्क के नष्ट होने के बाद।

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