रूसी तेल के बगैर काम चला सकती हैं भारतीय रिफाइनरी; ऐसे घट सकता है डीजल-विमान ईंधन का उत्पादन

नई दिल्ली, एजेंसी। भारतीय रिफाइनरी तकनीकी तौर पर रूस से कच्चे तेल की आपूर्ति के बिना काम चला सकती हैं, लेकिन इस बदलाव के लिए उन्हें आर्थिक और रणनीतिक स्तर पर व्यापक संतुलन स्थापित करना होगा। वैश्विक विश्लेषण फर्म केप्लर के अनुसार, रूसी कच्चे तेल को वैकल्पिक तेलों से बदलने से उत्पादन में बदलाव आएगा। इसके चलते डीजल और विमान ईंधन का उत्पादन कम होगा और अवशेष उत्पादन बढ़ जाएगा।विश्लेषकों के मुताबिक, रूसी कच्चा तेल उच्च डिस्टिलेट उत्पादन को बढ़ावा देता है। इसका फायदा यह है कि कच्चे तेल के शोधन के दौरान बनने वाले पेट्रोल, डीजल और विमान ईंधन का हिस्सा अधिक होता है। भारत की रिफाइनरी खपत में रूसी कच्चे तेल की हिस्सेदारी 38 प्रतिशत तक है।
गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से पिछले हफ्ते भारत से अमेरिकी आयात पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क लगाने की घोषणा के बाद रूस से तेल आयात रोकने या कम करने की चर्चा हो रही है। केप्लर ने अपनी रिपोर्ट भारतीय आयात पर अमेरिकी शुल्क : ऊर्जा बाजारों और व्यापार प्रवाह पर प्रभाव में कहा अगर तकनीकी नजरिये से देखे तो कुछ रणनीतिक कदमों के साथ भारतीय रिफाइनरी रूसी तेल के बिना काम चला सकती हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, भारी छूट और भारत की रिफाइनरी प्रणालियों के अनुकूल होने के कारण रूसी कच्चे तेल के आयात में वृद्धि हुई। रिपोर्ट के मुताबिक, गुणवत्ता की वजह से ही रूसी तेल ने सरकारी और निजी दोनों रिफाइनरियों को मजबूत मार्जिन बनाए रखने में मदद की। केप्लर ने कहा कि इसके उलट जाने पर मार्जिन पर अधिक प्रीमियम नहीं होगा।
तीन से पांच बिलियन डॉलर की बढ़ेगी लागत
वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों की मानें तो गैर-रूसी कच्चे तेल की कीमत रूसी बैरल की तुलना में लगभग 5 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल अधिक है। केप्लर ने कहा, इस अंतर पर 1.8 मिलियन बीपीडी को प्रतिस्थापित करने का अर्थ है कि मौजूदा स्थिर कीमतों के तहत लागत में 3-5 बिलियन अमेरिकी डॉलर की वार्षिक वृद्धि होगी।
विकल्प
केप्लर के मुताबिक, रूसी तेल का अफ्रीकी, लैटिन अमेरिकी कच्चा तेल विकल्प बन सकता है। अमेरिका से डब्ल्यूटीआई मिडलैंड जैसे ग्रेड इसमें 2,00,000-4,00,000 बैरल प्रतिदिन का योगदान दे सकते हैं, लेकिन ये कम डीजल उत्पादित करते हैं। लंबी दूरी की माल ढुलाई और लागत जैसे कारण भी इसे सीमित करेंगे। पश्चिम अफ्रीका और लैटिन अमेरिका (लैटिन अमेरिकी) कच्चे तेल मध्यम गुणवत्ता वाले होते हैं। अमेरिकी और अफ्रीकी/लैटिन अमेरिकी तेल रणनीतिक पूरक का काम कर सकता है।

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