सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ संपत्तियों के पंजीयन की तारीख आगे बढ़ाने से किया इनकार

नईदिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने उम्मीद पोर्टल पर वक्फ संपत्तियों की जानकारी अपलोड अपलोड करने की तारीख बढ़ाने से इनकार कर दिया है। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कहा कि अभिलेखों के डिजिटलीकरण में किसी भी तकनीकी गड़बड़ी पर वक्फ न्यायाधिकरण समय अवधि बढ़ाने पर निर्णय लेते समय विचार कर सकता है। पीठ ने कहा कि आवेदक कट-ऑफ तिथि से पहले राहत के लिए संबंधित न्यायाधिकरणों से संपर्क कर सकते हैं।
कोर्ट ने कहा, चूंकि आवेदकों के लिए वक्फ ट्रिब्यूनल के सामने पहले से ही उपाय मौजूद है, इसलिए वे 6 दिसंबर तक इसकी मांग कर सकते हैं। अगर पोर्टल में टाइम रुक जाता है, तो आपको जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। अगर ट्रिब्यूनल आपको इजाज़त देता है, तो आपके 6 महीने गिने जाएंगे और आपके आवेदन पर विचार किया जाएगा। आपको इजाजत की ज़रूरत नहीं है। अगर मुश्किल आती है, तो आप हमेशा हमारे सामने आवेदन दायर कर सकते हैं।
वक्फ संशोधन विधेयक 2 अप्रैल को लोकसभा और 3 अप्रैल को राज्यसभा से पारित हुआ था। 5 अप्रैल को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद 8 अप्रैल से यह पूरे देश में लागू हो गया था। कानून की संवैधानिकता के खिलाफ कई याचिकाएं दायर की गई थीं, लेकिन 15 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने कानून पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। हालांकि, कोर्ट ने कई प्रावधानों पर स्टे लगाया था।

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