जी राम जी Bill के खिलाफ संसद परिसर में TMC का धरना, गिरिराज सिंह बोले- विरोध करने वाले मजदूरों के दुश्मन

नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने विकसित भारत जी-राम-जी विधेयक पारित होने के विरोध में संसद परिसर में 12 घंटे के धरने पर बैठे तृणमूल कांग्रेस सांसदों की आलोचना की। उन्होंने विरोध प्रदर्शन को राजनीतिक चाल बताया, जिसका उद्देश्य मजदूरों को लाभ पहुंचाना नहीं है। उन्होंने कहा कि केवल वही लोग इस वीबी-जी-राम-जी विधेयक 2025 का विरोध करेंगे जिनका मजदूरों से कोई लेना-देना नहीं है। केवल वही लोग इसका विरोध करेंगे जिन्हें राजनीति
करनी है।
उन्होंने आगे कहा कि क्या 100 दिन की गारंटी के बजाय 125 दिन की गारंटी देना गलत है? यह मजदूरों के हित में है। जो लोग इसका विरोध कर रहे हैं वे मजदूरों के दुश्मन हैं। वे चाहे 12 दिन बैठें या 12 घंटे, लेकिन सच्चाई यह है कि यह मजदूरों की भलाई के लिए है। यह घटनाक्रम तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सदस्यों द्वारा विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) विधेयक पारित होने के विरोध में 12 घंटे के धरने पर बैठने के बाद सामने आया है। टीएमसी सांसद सागरिका घोष, डेरेक ओ’ब्रायन, सुष्मिता देव, डोला सेन, रितब्रता बनर्जी, मौसम नूर, प्रकाश चिक बराइक और पार्टी के अन्य सांसद, साथ ही इंडिया ब्लॉक के सांसद भी विरोध स्थल पर मौजूद थे।
टीएमसी सांसद डोला सेन ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की आलोचना करते हुए कहा कि पार्टी स्वतंत्रता संग्राम का हिस्सा नहीं थी, इसलिए महात्मा गांधी जैसे स्वतंत्रता सेनानियों का सम्मान नहीं करती। उन्होंने कहा, ‘भाजपा के लोग स्वतंत्रता आंदोलन का हिस्सा नहीं थे, इसलिए वे महात्मा गांधी और अन्य स्वतंत्रता सेनानियों का सम्मान नहीं करते।’ उन्होंने आगे कहा कि जब विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) विधेयक, 2025, जिसे वीबी-जी राम जी विधेयक के नाम से भी जाना जाता है, संसद में पारित हुआ, तो महात्मा गांधी की एक बार फिर हत्या कर दी गई।
उन्होंने कहा कि उनके पूर्ववर्ती, नाथूराम गोडसे ने महात्मा गांधी की हत्या की थी, और ये लोग उनका सम्मान करते हैं। महात्मा गांधी की हत्या 1948 में हुई थी, और कल सदन में उनकी एक बार फिर हत्या कर दी गई क्योंकि उनका नाम एनआरईजीए से हटा दिया गया। विपक्षी दलों के हंगामे के बीच यह विधेयक 18 दिसंबर को लोकसभा और 19 दिसंबर को राज्यसभा में पारित हुआ। सरकार का दावा है कि यह विधेयक एमजीएनआरईजीए विधेयक की तुलना में बेहतर शर्तों के साथ पेश किया गया है। एक प्रमुख विशेषता यह है कि इसमें गारंटीकृत कार्यदिवसों की संख्या 100 से बढ़ाकर 125 कर दी गई है।

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