प्रदूषण पर चर्चा क्यों नहीं? जयराम रमेश ने सरकार पर साधा निशाना, बोले- शीतकालीन सत्र बना प्रदूषण सत्र

नई दिल्ली, एजेंसी। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने शुक्रवार को वायु प्रदूषण को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि हाल ही में समाप्त हुआ संसद का शीतकालीन सत्र सरकार की इस मुद्दे पर व्यवस्थित बहस करने की अनिच्छा के कारण प्रभावी रूप से ‘प्रदूषण सत्र’ में तब्दील हो गया। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए रमेश ने कहा कि संसद में सरकार की प्रतिक्रिया से उन्हें गहरा सदमा लगा, जिसमें उन्होंने प्रदूषण और फेफड़ों से संबंधित बीमारियों के बीच किसी भी संबंध से इनकार किया।
कांग्रेस नेता ने कहा कि यह शीतकालीन सत्र नहीं, बल्कि प्रदूषण सत्र था। मैं उस समय स्तब्ध रह गया जब सरकार ने कल संसद में यह कहकर जवाब दिया कि प्रदूषण और फेफड़ों की समस्याओं के बीच कोई संबंध नहीं है। रमेश ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने देश भर में, विशेष रूप से उत्तर भारत में, जहां प्रदूषण का स्तर हफ्तों से गंभीर बना हुआ है, बिगड़ती वायु गुणवत्ता पर विस्तृत चर्चा की बार-बार मांग की थी। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने वायु प्रदूषण पर चर्चा की मांग की थी। हम लोकसभा और राज्यसभा में इस पर बहस चाहते थे। कांग्रेस नेता ने सरकार के इस दावे को खारिज कर दिया कि विपक्ष द्वारा व्यवधान डालने से प्रदूषण पर बहस नहीं हो सकी। उन्होंने बताया कि विपक्ष की मांगों के बावजूद लोकसभा को इस मुद्दे पर चर्चा किए बिना अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। दुर्भाग्य से, लोकसभा में ही सत्र को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने की घोषणा की गई। उन्होंने कहा कि सत्ताधारी पक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों का खंडन करते हुए, रमेश ने जोर देकर कहा कि चर्चा न होने की जिम्मेदारी सरकार की है। सरकार का यह बयान कि कांग्रेस के कारण प्रदूषण पर चर्चा नहीं हो सकी, गलत है। मैं इसे पूरी तरह से खारिज करता हूं।
रमेश की ये टिप्पणी संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू द्वारा शुक्रवार को कांग्रेस पर संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान वायु प्रदूषण पर प्रस्तावित चर्चा को बाधित करने का आरोप लगाने के बाद आई है। रिजिजू ने दावा किया था कि सरकार पूरे दिन की बहस के लिए तैयार थी, लेकिन विपक्ष के व्यवधान के कारण ऐसा करने से रोक दिया गया।

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