थिरुपरनकुंद्रम के मुरुगन मंदिर का नियंत्रण केंद्र को सौंपने की मांग, सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

नई दिल्ली। थिरुपरनकुंद्रम के भगवान मुरुगन सुब्रमण्य स्वामी मंदिर का पूरा नियंत्रण तमिलनाडु सरकार से लेकर केंद्र सरकार और पुरातत्व विभाग को सौंपने की मांग वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई है। इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और पुरातत्व विभाग को नोटिस जारी कर उनका जवाब मांगा है।
हिंदू धर्म परिषद नामक संगठन ने सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका दायर की है।
याचिका में मांग की गई है कि तमिलनाडु सरकार को निर्देश दिया जाए कि वह मदुरै के थिरुपरनकुंद्रम भगवान मुरुगन सुब्रमण्य स्वामी मंदिर का पूरा नियंत्रण केंद्र सरकार को सौंप दे।
साथ ही थिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी के शीर्ष पर स्थित दीपथून (पत्थर का प्राचीन दीप) में रोजाना 24 घंटे दीप प्रज्वल्लित करने की इजाजत दी जाए।
याचिका में ये भी मांग की गई है कि कार्तिगई के दिन पूरी थिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी पर दीप जलाने और भगवान मुरुगन के भक्तों को पूजा करने की मंजूरी दी जाए।
जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने याचिका पर केंद्र सरकार, एएसआई (पुरातत्व विभाग) तमिलनाडु सरकार, मदुरै जिला प्रशासन, मदुरै पुलिस आयुक्त और सुब्रमण्य स्वामी मंदिर के पदाधिकारियों को नोटिस जारी कर उनका जवाब मांगा है।
अब तक इस मामले में क्या हुआ
मद्रास उच्च न्यायालय ने बीती 1 दिसंबर को मंदिर प्रबंधन को थिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी की चोटी पर दीपक जलाने का आदेश दिया था।
तमिलनाडु सरकार ने आदेश को लागू करने में बाधा डालने की कोशिश की, जिसके लिए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को फटकार भी लगाई।
तमिलनाडु सरकार द्वारा अदालत के आदेश का पालन न करने पर अवमानना याचिका भी दायर की गई, जिस पर हाईकोर्ट ने 3 दिसंबर को सीआईएसएफ की सुरक्षा में भक्तों को पहाड़ी पर दीप प्रज्वलित करने की अनुमति दी।
आदेश का पालन न करने पर अदालत ने अवमानना आदेश जारी किया और राज्य के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को हाईकोर्ट में पेश होने का निर्देश दिया।
तमिलनाडु सरकार ने अवमानना आदेश के खिलाफ अपील दायर की, लेकिन हाईकोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। इसके बाद राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।
क्या है विवाद
मदुरै में थिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी पर स्थित मुरुगन मंदिर तमिल देवता भगवान मुरुगन का घर माना जाता है। कार्तिगई दीपम तमिलनाडु का बहुत पुराना और पवित्र त्योहार है जो कि कार्तिगई मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस दिन भगवान शिव की अग्नि रूप में पूजा की जाती है। हर मुरुगन मंदिर समेत थिरुपरनकुंद्रम स्थित मुरुगन मंदिर में भी यह पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन घर-घर दीये जलाए जाते हैं, इसलिए इसे ‘दीयों का त्योहार’ भी कहते हैं। इस साल कार्तिगई दीपम 4 दिसंबर को था।
थिरुपरनकुंद्रम की पहाड़ी पर भगवान सुब्रह्मण्य स्वामी (मुरुगन) के मंदिर के साथ ही, उसी पहाड़ी पर सिकंदर बादशाह दरगाह भी है। लंबे समय से यहां दोनों समुदाय शांति से रहते आए हैं। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में कुछ संगठनों ने पहाड़ी का नाम बदलने, कुर्बानी करने जैसे कदम उठाए, जिससे हिंदू संगठनों में गुस्सा भड़का। इस साल कार्तिगई उत्सव के दौरान थिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी की चोटी पर पारंपरिक दीपक जलाने के मुद्दे पर विवाद पैदा हो गया है। यह विवाद तब पैदा हुआ जब स्थानीय प्रशासन ने कई श्रद्धालुओं को पारंपरिक अनुष्ठान करने से रोक दिया। जिसके बाद तमिलनाडु भाजपा के प्रमुख नैनार नागेंद्रन समेत कई नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद यह विवाद हाईकोर्ट और अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया।

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