सिर्फ नागरिकता नहीं, रहने का भी अधिकार दिया जाए… पाकिस्तान से आए हिंदुओं के लिए सुप्रीम कोर्ट को ऐसा क्यों बोलना पड़ा?

नई दिल्ली, एजेंसी। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार को पाकिस्तान से आए अनुसूचित जाति के हिंदुओं को सही घर देने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ़ उन्हें भारतीय नागरिकता देना ही काफी नहीं है और सरकार को यह भी पक्का करना चाहिए कि उन्हें सही तरीके से घर मिले। सुप्रीम कोर्ट के वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा कि फिलहाल, दिल्ली के मजनू का टीला में करीब 250 परिवार और एक हज़ार लोग रह रहे हैं। वकील विष्णु शंकर ने कहा कि ये सभी पाकिस्तानी हिंदू हैं जो पाकिस्तान में धर्म के आधार पर उत्पीड़न और परेशानी झेलने के बाद भारत आए हैं। वे पिछले 12 सालों से मजनू का टीला के कैंप में रह रहे हैं।
विष्णु शंकर ने कहा कि दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी (DDA) ने वहां एक नोटिस लगाया और उन्हें जगह खाली करने को कहा। उन्होंने कहा कि हमने उस आदेश के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में अपील की। ​​दिल्ली हाई कोर्ट ने काफी समय तक DDA और आवास और शहरी विकास मंत्रालय के साथ इस मामले पर तालमेल बिठाया और निगरानी की, लेकिन कोई पॉलिसी नहीं बन पाई। विष्णु शंकर जैन ने कहा कि नतीजतन हाई कोर्ट ने आखिर में पैराग्राफ 23 में लिखा कि वे बहुत निराश हैं कि वे कोई पॉलिसी नहीं बना पाए। उन्होंने कहा कि नौकरशाही की कमियों और नौकरशाही के कंट्रोल की वजह से मामला हल नहीं हो पाया। आखिर में दिल्ली हाई कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी।
नागरिकता मिल गई तो रहने का अधिकार क्यों नहीं?
एडवोकेट विष्णु ने बताया कि इसके बाद मामला उस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में गया और सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी के उन्हें हटाने के आदेश पर रोक लगा दी। सुप्रीम कोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि जब उन्हें नागरिकता संशोधन कानून के तहत नागरिकता मिल गई है, तो उन्हें वहां रहने का अधिकार क्यों नहीं होना चाहिए? आज इसी मामले में भारत सरकार की एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी भी केंद्र सरकार की तरफ से पेश हुईं। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने उनसे चार हफ्ते के अंदर इस मामले पर सबसे ऊंचे लेवल पर विचार करने और फिर कोर्ट को बताने को कहा है, क्योंकि जब उन्हें नागरिकता मिल गई है, तो उन्हें कहीं न कहीं रहने की जगह दी जानी चाहिए। यह मामला अब चार हफ्ते बाद फिर से कोर्ट के सामने आएगा।

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