ट्रंप के दबाव में झुका ईरान, परमाणु मुद्दे पर अमेरिका से बातचीत को तैयार; राष्ट्रपति मसूद ने दिए आदेश

तेहरान। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सख्त नीतियों और सैन्य दबाव ने ईरान को बैकफुट पर ला दिया है। खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच एक बड़ा कूटनीतिक बदलाव देखने को मिला है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने परमाणु मुद्दे पर अमेरिका के साथ बातचीत शुरू करने का औपचारिक आदेश दे दिया है। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी ‘फार्सÓ ने एक उच्च पदस्थ सूत्र के हवाले से इसकी पुष्टि की है। इस कदम को ट्रंप प्रशासन की आक्रामक रणनीति का परिणाम माना जा रहा है।
तुर्की में हो सकती है मुलाकात, ईरान कर रहा समीक्षा
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने सोमवार को पुष्टि की कि ईरान अमेरिका के साथ बातचीत शुरू करने के संभावित विवरण और सामान्य रूपरेखा की समीक्षा कर रहा है। पश्चिमी मीडिया में आई रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों देशों के बीच अगले कुछ दिनों में तुर्की में एक अहम बैठक हो सकती है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए बघाई ने कहा कि ईरान अभी निर्णय लेने के चरण में है और इस मुद्दे के हर पहलू की बारीकी से जांच कर रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान के लिए ‘समयÓ बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि पिछले कुछ दौर की बातचीत में दूसरे पक्षों ने प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल किया है। क्षेत्रीय देश इस समय दोनों पक्षों के बीच संदेशवाहक की भूमिका निभा रहे हैं।
अविश्वास और प्रतिबंध हटाने की शर्त
बघाई ने अमेरिका के पुराने रिकॉर्ड पर सवाल उठाते हुए कहा कि पिछले दस वर्षों में ईरान को अक्सर अमेरिका से धोखा मिला है और वादों को पूरा नहीं किया गया। उन्होंने पिछले साल जून में इजरायल और अमेरिका द्वारा किए गए हमले का हवाला देते हुए कहा कि अमेरिका के व्यवहार में साफ विरोधाभास है। इसके बावजूद, ईरान ने हमेशा कूटनीतिक रास्ता अपनाने की प्रतिबद्धता दिखाई है। प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर दुनिया की चिंताएं दूर करने को तैयार है, लेकिन इसके बदले में प्राथमिकता के आधार पर प्रतिबंधों को हटाना होगा। उन्होंने कहा कि प्रतिबंधों का हटना ईरान के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी।
जंगी जहाज तैनात, ट्रंप ने दी थी चेतावनी
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव इस वक्त चरम पर है। जनवरी के अंत में ट्रंप प्रशासन ने मध्य पूर्व में एक विमानवाहक पोत स्ट्राइक ग्रुप और कई युद्धपोत तैनात कर दिए थे, जिससे ईरान पर भारी दबाव बना है। राष्ट्रपति ट्रंप ने रविवार को कड़े लहजे में कहा था कि यदि ईरान परमाणु समझौता करने में विफल रहता है, तो ‘हमें पता चल जाएगाÓ कि ईरानी सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की वह चेतावनी कितनी सही थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिकी हमला क्षेत्रीय युद्ध को भड़का सकता है। इस बीच, ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने सीएनएन को दिए इंटरव्यू में कहा कि अगर वाशिंगटन अपनी दबाव वाली नीति छोड़ दे, तो कम समय में एक ‘न्यायपूर्ण और निष्पक्षÓ परमाणु समझौता हासिल किया जा सकता है।

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