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19 Feb 2026, Thu

बरीमाला में प्रसाद व्यवस्था में खामियां, हाईकोर्ट ने एसआईटी को 45 दिनों में जांच पूरी करने को कहा

तिरुवनंतपुरम, एजेंसी। केरल हाईकोर्ट ने सबरीमला मंदिर में प्रसाद की बिक्री और उससे होने वाली आय के प्रबंधन को लेकर त्रावणकोर देवास्वम बोर्ड (टीडीबी) की कार्यप्रणाली में गंभीर और प्रणालीगत खामियां पाई हैं। अदालत ने कहा कि अब समय आ गया है कि बोर्ड एक व्यापक, पारदर्शी और जवाबदेह ढांचा बनाए जिससे बोर्ड की आय को सुरक्षित रखा जा सके और उसमें होने वाले भ्रष्टाचार को रोका जा सके। जस्टिस राजा विजयराघवन वी और के. वी. जयकुमार की खंडपीठ ने विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन ब्यूरो (VACB) की विशेष जांच टीम (SIT) की रिपोर्ट की जांच करने के बाद ये टिप्पणियां कीं। एसआईटी की यह जांच मंदिर के प्रसाद ‘अडिया सिष्टम घी’ की बिक्री से संबंधित कथित गड़बड़ी के मामले में की जा रही है। यह पवित्र प्रसाद सबरीमाला स्थित भगवान अय्यप्पा मंदिर में श्रद्धालुओं को बेचा जाता है।
अदालत ने क्या कहा
एसआईटी ने अदालत को बताया कि उसने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत 33 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इनमें मंदिर के विशेष अधिकारी और लगभग 30 काउंटर कर्मचारी शामिल हैं।
खंडपीठ ने एसआईटी को निर्देश दिया कि वह जांच को आगे बढ़ाए और 45 दिनों के भीतर जांच पूरी करें।
रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों पर टिप्पणी करते हुए अदालत ने कहा कि कई अनियमितताएं सामने आई हैं, जो गहरी जड़ें जमा चुकी प्रणालीगत कमियों का संकेत देती हैं। अदालत ने कहा कि ये अलग-थलग घटनाएं नहीं हैं, बल्कि प्रक्रिया, निगरानी, स्टॉक लेखांकन और वित्तीय नियंत्रण में व्यापक खामियों को दर्शाती हैं।
अदालत ने यह भी कहा कि रिकॉर्ड रखने और प्रसाद की बिक्री से होने वाली आय के लेखे-जोखे में लापरवाही और ढिलाई चौंकाने वाली है।
अदालत ने निर्देश दिया कि प्रसाद सामग्री—जैसे अप्पम, अडिया सिष्टम घी, अरवना, विभूति, कुमकुम और अन्य की बिक्री से होने वाली समस्त आय को जवाबदेह और पारदर्शी वित्तीय एवं प्रशासनिक ढांचे के अंतर्गत लाया जाना चाहिए।
अदालत ने सुझाव दिया कि एक चरणबद्ध प्रक्रिया लागू की जाए, जिसमें प्रतिदिन और मौसमी आधार पर भक्तों द्वारा चढ़ाए जाने वाले प्रसाद की मात्रा के आकलन से लेकर बिक्री की आय जमा करने तक की पूरी प्रक्रिया शामिल हो।
खंडपीठ ने निर्देश दिया कि यह ढांचा तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए और जरूरत पड़ने पर पेशेवर एवं तकनीकी सहायता ली जाए। अदालत ने कहा कि फिलहाल बोर्ड के पास आवश्यक संस्थागत क्षमता, तकनीकी विशेषज्ञता और प्रणालीगत तंत्र का अभाव है।
अदालत ने बोर्ड को निर्देश दिया कि वह एक विस्तृत कार्ययोजना अदालत के सामने पेश करें, जिसमें इन निर्देशों के पालन की पूरी जानकारी होनी चाहिए। मामले की अगली सुनवाई 27 फरवरी को निर्धारित की गई है।

By Aryavartkranti Bureau

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