‘समुद्री डकैती-आतंकवाद, साइबर समस्या बड़ी चुनौतियां’, कोई नौसेना अकेले सामना करने में अक्षम: राजनाथ

विशाखापत्तनम। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह आज भारतीय नौसेना की तरफ से आयोजित प्रमुख द्विवार्षिक बहुपक्षीय समुद्री अभ्यास मिलन 2026 के 13वें संस्करण के उद्घाटन के लिए विशाखापत्तनम पहुंचे। जहां उन्होंने उद्घाटन समारोह को संबोधित किया। इस दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि आज समुद्री डकैती, समुद्री आतंकवाद, अवैध मछली पकड़ना, तस्करी, साइबर कमजोरियां और जरूरी आपूर्ति श्रृंखलाओं में बाधाएं वैश्विक समुद्री सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन चुकी हैं। इसके साथ ही जलवायु परिवर्तन के कारण प्राकृतिक आपदाएं बढ़ रही हैं, जिससे मानवीय सहायता और आपदा राहत अभियानों की आवश्यकता अधिक बार और व्यापक रूप से पड़ रही है।
‘कोई नौसेना अकेले सामना करने में अक्षम’
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने स्पष्ट कहा कि कोई भी एक नौसेना, चाहे वह कितनी भी सक्षम क्यों न हो, इन सभी चुनौतियों का अकेले सामना नहीं कर सकती। इसलिए नौसेनाओं के बीच सहयोग अब विकल्प नहीं, बल्कि अनिवार्यता है। इस वर्ष 74 देशों की भागीदारी के साथ ‘मिलन-2026’ अब तक का सबसे बड़ा और सबसे समावेशी आयोजन बन गया है। यह इस बात का प्रमाण है कि वैश्विक समुद्री समुदाय भारत को एक भरोसेमंद और जिम्मेदार समुद्री भागीदार के रूप में देखता है। आज की विशिष्ट जिम्मेदारियां अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपेक्षा करती हैं कि वह परस्पर सम्मान की भावना से मिलकर चुनौतियों का समाधान करे।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की ‘मिलन’ की तारीफ
उन्होंने कहा कि जब कई देशों के युद्धपोत साथ-साथ समुद्र में चलते हैं, जब नाविक एक साथ प्रशिक्षण लेते हैं, और जब कमांडर सामूहिक विचार-विमर्श करते हैं, तब भौगोलिक और राजनीतिक सीमाओं से ऊपर उठकर साझा समझ विकसित होती है। ‘मिलन’ जैसे मंच पेशेवर विशेषज्ञता को एक साथ लाते हैं, आपसी विश्वास को मजबूत करते हैं, संयुक्त रूप से काम करने की क्षमता बढ़ाते हैं, और साझा चुनौतियों के लिए समन्वित प्रतिक्रिया देने में मदद करते हैं।
‘भारत एक न्यायसंगत समुद्री व्यवस्था की स्थापना का आकांक्षी’
उन्होंने कहा- समुद्र में संयुक्त अभ्यास, बैठकों के दौरान पेशेवर संवाद और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के माध्यम से हम स्थायी मित्रता के बंधन को सुदृढ़ करने की प्रतिबद्धता दोहराते हैं। भारत एक न्यायसंगत समुद्री व्यवस्था की स्थापना का आकांक्षी है, जो अंतरराष्ट्रीय नियमों और कानूनों के अनुरूप समुद्री आवागमन की स्वतंत्रता पर आधारित हो।
‘सच्चे ‘विश्व-मित्र’ के रूप में भारत भरोसेमंद भूमिका निभाता रहेगा’
रक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि इस कानूनी ढांचे को एक व्यापक वैश्विक नौसैनिक संरचना के माध्यम से और मजबूत किया जा सकता है। संचार मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करें और समुद्र में आतंकवाद सहित आपराधिक गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाएं। साथ ही वैश्विक स्तर पर राष्ट्रीय सीमाओं की सुरक्षा की पारंपरिक भूमिका भी निभाएं। भारत लंबे समय से इस सहयोग की आवश्यकता को पहचानता रहा है। इसी सोच के तहत क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास की परिकल्पना से आगे बढ़ते हुए अब परस्पर और समग्र उन्नति पर आधारित व्यापक दृष्टिकोण को अपनाया गया है। एक सच्चे ‘विश्व-मित्र’ के रूप में भारत क्षेत्र में रचनात्मक और भरोसेमंद भूमिका निभाता रहेगा।

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