सरकार कुष्ठ रोग उन्मूलन के लिए प्रतिबद्ध – मयंकेश्वर शरण सिंह

  • कुष्ठ रोग उन्मूलन के लिए पांच वर्षीय कार्ययोजना तैयार करने पर जोर

लखनऊ । उत्तर प्रदेश में कुष्ठ रोग के नए मामलों की शीघ्र पहचान, संक्रमण की रोकथाम, दिव्यांगता में कमी और प्रभावित व्यक्तियों के गरिमापूर्ण जीवन के लिए पांच वर्षीय कार्ययोजना तैयार की जाएगी। इसके तहत प्राथमिकता वाले जिलों और ब्लॉकों की पहचान, स्वास्थ्यकर्मियों का प्रशिक्षण, नियमित समीक्षा और प्रभावित व्यक्तियों को आवश्यक सेवाओं से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

इन प्राथमिकताओं पर चर्चा के लिए 23 और 24 अक्टूबर को लखनऊ के ताज महल होटल में दो दिवसीय राज्य स्तरीय सम्मेलन आयोजित किया गया। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, उत्तर प्रदेश के तत्वावधान में राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम, आईएलईपी इंडिया, निप्पोन फाउंडेशन और सासाकावा हेल्थ फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित इस सम्मेलन में नीति-निर्माताओं, स्वास्थ्य विशेषज्ञों, विकास सहयोगियों, शिक्षाविदों, अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं और अन्य हितधारकों ने अनुभव साझा किए तथा कुष्ठ उन्मूलन की रणनीतियों पर चर्चा की।

सम्मेलन का उद्घाटन मुख्य अतिथि राज्य स्वास्थ्य मंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह, प्रमुख सचिव, चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार और चिकित्सा शिक्षा  कल्याण वी. हेकाली झिमोमी तथा सासाकावा हेल्थ फाउंडेशन के अध्यक्ष योहेई सासाकावा ने किया।

राज्य स्वास्थ्य मंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश ने पिछले दस वर्षों में स्वास्थ्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। हम जेई पर काबू पा चुके हैं और पिछले तीन वर्ष में इस बीमारी से प्रदेश में एक भी बच्चे की मृत्यु नही हुई है। इसी तरह सिकल सेल एनीमिया और सर्वाइकल कैंसर के खिलाफ भी जंग जारी है। उन्होंने कहा कि सरकार कुष्ठ रोग उन्मूलन के लिए भी प्रतिबद्ध है। हालांकि, रोग से जुड़ा सामाजिक कलंक अब भी चुनौती है। उन्होंने आश्वस्त किया कि राज्य सरकार विश्व स्वास्थ्य संगठन और सासाकावा हेल्थ फाउंडेशन के साथ मिलकर चिन्हित दस विषयों पर काम करेगी, ताकि कुष्ठ-मुक्त उत्तर प्रदेश का लक्ष्य हासिल किया जा सके।

प्रमुख सचिव वी. हेकाली झिमोमी ने कहा कि अधिक मामले वाले जिलों में सघन रोगी खोज अभियान चलाकर शीघ्र पहचान और समय पर उपचार सुनिश्चित करना जरूरी है। उन्होंने सीएचओ और अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्यकर्मियों के नेटवर्क को मजबूत करने, उनकी क्षमता बढ़ाने और कुष्ठ प्रभावित व्यक्तियों को सामाजिक बहिष्कार से बचाने पर जोर दिया।

सम्मेलन में प्रमुख सचिव, आयुष विभाग, उत्तर प्रदेश शासन, रंजन कुमार ने कुष्ठ रोग उन्मूलन सहित विभिन्न जनस्वास्थ्य कार्यक्रमों में आयुष प्रणाली की भूमिका, प्रदेश में उपलब्ध व्यापक स्वास्थ्य अवसंरचना तथा विभिन्न चिकित्सा प्रणालियों के बीच समन्वय की संभावनाओं पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उपस्थित सभी अधिकारियों ने कुष्ठ उन्मूलन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाते हुए लखनऊ डिक्लेरेशन पर हस्ताक्षर भी  किये।

कुष्ठ से दिव्यांगता की रोकथाम और प्रभावित व्यक्तियों के लिए सम्मानजनक जीवन है लक्ष्य : राज्य कुष्ठ रोग अधिकारी डॉ. जया देहलवी ने वैश्विक, राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर कुष्ठ रोग की स्थिति साझा की। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025-26 में देश में कुष्ठ रोग के 91,783 नए मामले दर्ज किए गए, जबकि उपचार पूर्ण करने की दर 97 प्रतिशत से अधिक रही। वहीँ उत्तर प्रदेश में 11,097 मामले दर्ज किए गए। सक्रिय रोगी खोज अभियान के माध्यम से शीघ्र पहचान और समय पर उपचार सुनिश्चित किया जा रहा है। रोगियों के निकट संपर्कों को संक्रमण से बचाव के लिए रिफैम्पिसिन की एकल खुराक दी जा रही है। इसके साथ ही कुष्ठ रोग से दिव्यांग व्यक्तियों को पेंशन, विशेष चप्पल, घावों की देखभाल, शल्य चिकित्सा और पुनर्वास सेवाओं से जोड़ा जा रहा है।  हमारा लक्ष्य है कि दिव्यांगता की रोकथाम हो और प्रभावित व्यक्ति सम्मानजनक जीवन जी सकें।

कुष्ठ उन्मूलन में चिकित्सा के साथ मानवाधिकारों पर भी ध्यान जरूरी : सासाकावा हेल्थ फाउंडेशन के अध्यक्ष योहेई सासाकावा ने कुष्ठ उन्मूलन के लिए फाउंडेशन की पांच दशकों की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि कुष्ठ रोग केवल चिकित्सा का विषय नहीं है, बल्कि इससे जुड़े भेदभाव और सामाजिक बहिष्कार को भी दूर करना जरूरी है। शुरुआती लक्षण स्पष्ट न होने और भेदभाव के डर से कई लोग उपचार के लिए आगे नहीं आते। उन्होंने प्रभावित व्यक्तियों की आवाज और अनुभवों को भविष्य की रणनीति में शामिल करने पर जोर दिया।

भारत में विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रतिनिधि डॉ. इवान जे.-एफ. हुटिन वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के साथ कुष्ठ सेवाओं के एकीकरण से शीघ्र पहचान मजबूत करने, साझेदारों के सहयोग से गुणवत्तापूर्ण देखभाल और सामाजिक समावेशन सुनिश्चित करने तथा संक्रमण और रोग से जुड़े कलंक को समाप्त करने पर जोर दिया।

सम्मेलन में शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, पंचायती राज और आयुष विभागों की भूमिका पर भी चर्चा हुई। सम्मेलन से प्राप्त सुझावों के आधार पर अगले पांच वर्षों के लिए समयबद्ध कार्ययोजना तैयार की जाएगी।

सम्मेलन में केंद्र सरकार के केंद्रीय कुष्ठ रोग प्रभाग, सात उच्च प्रसार वाले राज्यों के राज्य कुष्ठ रोग अधिकारियों और उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों के जिला कुष्ठ रोग अधिकारियों ने भाग लिया। बीएचयू, केजीएमयू, आगरा मेडिकल कॉलेज और एम्स गोरखपुर सहित चिकित्सा संस्थानों, त्वचा रोग विशेषज्ञों, विभिन्न चिकित्सा संगठनों, कुष्ठ प्रभावित व्यक्तियों, स्वास्थ्यकर्मियों, आशा कार्यकर्ताओं, सहयोगी संगठनों और मीडियाकर्मियों ने भी सहभागिता की।

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