आम जनता को बड़ी राहत, 7 महीने के निचले स्तर पर आई खुदरा महंगाई

होली से पहले महंगाई के मोर्चे पर आम जनता को बड़ी राहत मिली है। बुधवार को जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार, कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (सीपीआई) पर आधारित भारत की खुदरा महंगाई फरवरी 2025 में घटकर 3.61 प्रतिशत हो गई, जो जनवरी में 4.31 प्रतिशत थी। ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि खाद्य कीमतों में बढ़ोतरी धीमी हो गई थी। इसी के साथ खुदरा महंगाई फरवरी में घटकर 7 महीने के निचले स्तर पर आ गई जो रिजर्व बैंक के लक्ष्य 4 फीसदी से भी कम है।
आरबीआई 2-6 फीसदी का टॉलरेंस बैंड बनाए रखता है। इसी पहले 45 अर्थशास्त्रियों के रॉयटर्स पोल ने पहले फरवरी में मुद्रास्फीति 3.98 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था। इस बीच, भारत की औद्योगिक उत्पादन वृद्धि जनवरी 2025 में साल-दर-साल 5 प्रतिशत हो गई, जबकि दिसंबर 2024 में यह 3.2 प्रतिशत थी।
इस साल कितनी रहेगी महंगाई
अपनी सबसे हालिया मौद्रिक नीति बैठक में, रिज़र्व बैंक ने वित्तीय वर्ष 2024-25 (FY25) के लिए अपने सीपीआई मुद्रास्फीति पूर्वानुमान को 4.8 प्रतिशत पर बनाए रखा, अंतिम तिमाही (Q4FY25) में 4.4 प्रतिशत की मामूली गिरावट की आशंका जताई। FY26 के लिए, मुद्रास्फीति तिमाही अनुमान के साथ 4.2 प्रतिशत होने का अनुमान है।
कैसे आई गिरावट?
फरवरी के दौरान मुख्य मुद्रास्फीति और खाद्य मुद्रास्फीति में उल्लेखनीय गिरावट मुख्य रूप से सब्जियों, अंडे, मांस और मछली, दालों और इसके उत्पादों और दूध और उसके उत्पादों की मुद्रास्फीति में गिरावट के कारण हुई है।
आरबीआई ने मुद्रास्फीति के मोर्चे पर चिंताएं कम करने के लिए फरवरी में नीतिगत ब्याज दर में 0.25 प्रतिशत की कटौती करने का फैसला किया था। आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति की अगली समीक्षा बैठक अप्रैल की शुरुआत में होने वाली है।
सरकार ने आरबीआई को खुदरा मुद्रास्फीति को दो प्रतिशत की घट-बढ़ के साथ चार प्रतिशत के भीतर रखने का दायित्व सौंपा हुआ है। आरबीआई अपनी मौद्रिक दरों का फैसला करते समय खुदरा मुद्रास्फीति पर विशेष ध्यान देता है।
रॉयटर्स ने दिया था ये अनुमान
रॉयटर्स ने 4 से 10 मार्च के बीच 45 इकोनॉमिस्ट के साथ सर्वे किया था। सर्वे के मुताबिक, फरवरी में कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स में सालाना बदलाव के आधार पर महंगाई दर घटकर 3.98% रहने का अनुमान लगाया गया था। जनवरी में यह 4.31% थी। आज आंकड़े आने के बाद ताजा सीपीआई 3.61 रह गई है। ताजा सर्दियों की उपज बाजारों में आने से खाने-पीने की चीजों की कीमतों में लगातार कमी आई है, जिस कारण खाद्य वस्तुएं महंगाई की टोकरी का लगभग आधा हिस्सा बनाती हैं।

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