कोई धर्म ऐसी अनुमति नहीं देता…बेताहाशा पेड़ों की कटाई पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

नई दिल्ली। बेताहाशा पेड़ों की कटाई पर SC ने सख्त टिप्पणी की है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कोई भी धर्म इस तरह से पेड़ों को काटने की अनुमति नहीं देता है। सुप्रीम कोर्ट ने एक मंदिर प्रबंधन द्वारा अवैध रूप से पेड़ों को काटने से संबंधित याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा। जस्टिस अभय ओका और जस्टिस उज्जल भुयान की बेंच ने कहा कि आप वन विभाग को प्रति पेड़ कितना मुआवजा देंगे और आप कितने पेड़ लगाएंगे?
मंदिर प्रबंधन के वकील ने कहा कि पहले से ही 300 पेड़ लगाए जा चुके हैं। हम 100 और लगाने के लिए तैयार हैं। यह बहुत गरीब मंदिर है, इन लोगों के पास पैसे नहीं हैं।
मंदिर के चढ़ावे को वन विभाग को दिया जा सकता है
जस्टिस ओका ने कहा कि आने वाले त्योहार में लोग मंदिर को कुछ न कुछ चढ़ाएंगे, है न? तो इस त्योहार में मंदिर को जो भी चढ़ाया जाता है, वह वन विभाग को दिया जा सकता है। इतना ही आसान है। एक अंडरटेकिंग दें, जिसमें यह बताया जाए कि त्यौहार के दौरान आपके मंदिर को चढ़ावे से कितनी राशि मिलती है। वह राशि आप वन विभाग को मुआवजे के तौर पर देंगे। इससे समस्या हल हो जाएगी।
पेड़ों को काटने की इतनी मजबूरी क्या?
हैदराबाद यूनिवर्सिटी मामले में भी पेड़ों की कटाई को लेकर भी सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई थी। जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच स्वत: संज्ञान लेते हुए इसे बहुत गंभीर विषय बताया था।
सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि पेड़ों की तुरंत कटाई को लेकर इतनी भी क्या मजबूरी है। इसको लेकर मुख्य सचिव को जानकारी दी जाए। कोर्ट ने कहा कि क्या राज्य ने इस तरह के काम के लिए पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन प्रमाणपत्र हासिल किया है। बेंच ने मामले की अगली सुनवाई की तिथि 16 अप्रैल निर्धारित की है।

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