एसिड अटैक पीड़ितों के लिए नीति पर हाईकोर्ट सख्त, प्रमुख सचिवों को किया तलब, कहा- 9 साल बाद भी नहीं बनी स्थायी पुनर्वास नीति

प्रयागराज। प्रयागराज में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एसिड अटैक पीड़ितों के पुनर्वास और सहायता व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। अदालत ने गृह विभाग और महिला एवं बाल कल्याण विभाग के प्रमुख सचिवों को 25 मई को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया है।
यह आदेश एक एसिड अटैक पीड़िता की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया। जिसमें पीड़िता ने राज्य की ओर से पुनर्वास और दीर्घकालिक सहायता की मांग की थी। अदालत ने कहा कि घटना के नौ साल बाद भी राज्य सरकार पीड़ितों के लिए व्यापक सहायता प्रणाली तैयार करने में विफल रही है।
न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने सरकार से चिकित्सा उपचार, पुनर्निर्माण सर्जरी, काउंसलिंग, शिक्षा और रोजगार सहायता के लिए ठोस व्यवस्था का खाका पेश करने को कहा है। अदालत ने सरकार की केवल एकमुश्त आर्थिक सहायता देने की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए।
एसिड अटैक पीड़ितों की जिंदगी पर असर
कोर्ट ने कहा कि एसिड अटैक पीड़ितों की जिंदगी पर आजीवन असर पड़ता है। इसलिए मामूली और अस्थायी मुआवजे के बजाय उन्हें दीर्घकालिक और संरचनात्मक सहायता की जरूरत है।
हाईकोर्ट ने सरकार से यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि पीड़ितों को दिए जाने वाले मुआवजे की राशि को चोट की गंभीरता और उसके जीवनभर पड़ने वाले प्रभाव को ध्यान में रखते हुए किस तरह तय और संतुलित किया जाएगा।
अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि कई अवसर और पूर्व आदेशों में उठाए गए सवालों के बावजूद अब तक यह स्पष्ट नहीं किया गया कि एसिड अटैक पीड़ितों के लिए व्यापक नीति क्यों नहीं बनाई गई। कोर्ट ने कहा कि अब इस मुद्दे पर वरिष्ठ अधिकारियों के साथ सीधे विचार-विमर्श की जरूरत है ताकि नीति निर्माण में आ रही बाधाओं को दूर कर जल्द प्रभावी व्यवस्था लागू की जा सके।

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