वॉशिंगटन, एजेंसी। रूस के खिलाफ पर्दे के पीछे से दुश्मनी और दोस्ती का खेल अमेरिका हमेशा से खेलता रहा है। 2022 में यूक्रेन के वोल्दोमीर जेलेंस्की को अपने पाले में कर अमेरिका ने युद्ध करवा दिया। अब जेलेंस्की जब शांत पड़ गए हैं, तो अमेरिका ने पुतिन के एक और कट्टर दुश्मन से दोस्ती का हाथ बढ़ा लिया है। पुतिन के ये कट्टर दुश्मन है- सीरिया के नए राष्ट्रपति अल-शरा।
रिपोर्ट के मुताबिक अगले महीने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सऊदी अरब के दौरे पर आ रहे हैं। ट्रंप यहां पर अल शरा से मुलाकात करेंगे। सीरिया में बगावत के बाद अल शरा को कमान मिली है। अल शरा को रूस का दुश्मन माना जाता है।
अहमद अल शरा रूस के दुश्मन कैसे हैं?
सीरिया में पहले बशर-अल-असद की सरकार थी। बशर-अल-असद को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का करीबी माना जाता था। दिसंबर 2024 में सीरिया में बड़ी बगावत हो गई, जिसके बाद असद को वहां की सत्ता छोड़नी पड़ गई।
असद सीरिया से भागने के बाद रूस पहुंच गए। रूस के राष्ट्रपति के रहम पर ही बशर अपनी जिंदगी अभी जी रहे हैं। सीरिया की नई सरकार उन्हें वापस लाने की कवायद कर रही है, लेकिन पुतिन की वजह से यह संभव नहीं हो पा रहा है।
अल-शरा से क्यों मिलेंगे ट्रंप?
गृह युद्ध की वजह से सीरिया भीषण बिजली संकट से जूझ रहा है। कई प्रयास के बावजूद भी सीरिया के लोगों को सिर्फ 2 घंटे की बिजली मिल पा रही है। सीरिया के राष्ट्रपति की पहली कोशिश इसे दुरुस्त करने की है। सीरिया रूस से बिजली खरीदता था, लेकिन बशर अल असद की वजह से यह अभ संभव नहीं हो पा रहा है। ऐसे में अब सीरिया की नजर अमेरिका पर है। सीरिया अमेरिका से बिजली खरीदने की कवायद में है। वहीं अमेरिका सीरिया में अपना जनाधार मजबूत कर ईरान को घेरने में जुटा है। ईरान के सुप्रीम लीडर अब्दुल्ला खामनेई को बशर अल असद का करीबी माना जाता रहा है। अमेरिका खामनेई के खिलाफ लंबे वक्त से मोर्चा खोल रखा है। इस मोर्चेबंदी में उसे सीरिया की जरूरत है।