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24 Feb 2026, Tue

लखनऊ में ढहाए गए घरों के सदस्यों का वोटर लिस्ट से नाम गायब, सुप्रीम कोर्ट ने दिखाई सख्ती

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को लखनऊ के जिला चुनाव अधिकारी को निर्देश दिया कि वे राज्य की राजधानी के अकबर नगर के 91 निवासियों की शिकायतों की जांच करें और आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाएं। इन निवासियों को कथित रूप से सितंबर 2023 में उनके घरों के ध्वस्तीकरण के बाद उत्तर प्रदेश की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची से बाहर कर दिया गया था।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने शुरुआत में यह राय व्यक्त की कि याचिकाकर्ताओं के निवास से संबंधित विवादित तथ्यों का परीक्षण रिट याचिका में सीधे तौर पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा नहीं की जा सकती। हालांकि, पीठ ने सना परवीन और 90 अन्य द्वारा दायर याचिका पर ध्यान देते हुए लखनऊ के जिला निर्वाचन अधिकारी को शिकायतों की जांच कर उचित राहत प्रदान करने का निर्देश दिया।
अदालत ने यह भी स्वतंत्रता प्रदान की कि यदि याचिकाकर्ताओं को जिला निर्वाचन अधिकारी से राहत नहीं मिलती है तो वे इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ का रुख कर सकते हैं। याचिकाकर्ताओं ने आग्रह किया था कि उन्हें बूथ लेवल अधिकारियों (BLOS) को अपने नामांकन प्रपत्र जमा करने की अनुमति दी जाए।
विस्थापन के कारण नहीं किया जा सकता वंचित
कोर्ट ने आगे कहा कि ताकी सितंबर 2023 के ध्वस्तीकरण अभियान के बाद स्थायी पते के अभाव के बावजूद उनका मतदान का अधिकार सुरक्षित रह सके। याचिकाकर्ताओं की ओर से सीनियर वकील एम.आर. शमशाद ने पीठ को बताया कि ये निवासी 2025 की पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान एक विशेष सूची का हिस्सा थे और विस्थापन के कारण उन्हें मताधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।

By Aryavartkranti Bureau

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