एलपीजी गैस संकट पर पीएम मोदी का कड़ा रुख, मंत्रियों को दिए सख्त निर्देश

नई दिल्ली।  ईरान में चल रहे युद्ध के कारण देश भर में एलपीजी गैस सिलेंडरों की किल्लत और लंबी लाइनों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्थिति पर कड़ी नजर बनाए रखी है। गुरुवार को अपने मंत्रियों के साथ हुई एक अहम बैठक में पीएम मोदी ने सख्त निर्देश दिए हैं कि जो लोग इस संकट का फायदा उठाकर देश में घबराहट और पैनिक का माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं, उन पर पैनी नजर रखी जाए। उन्होंने मंत्रियों से स्पष्ट कहा कि वे सोशल मीडिया पर पूरी तरह एक्टिव रहें और विपक्ष द्वारा फैलाए जा रहे किसी भी प्रोपेगेंडा या भ्रामक प्रचार का आक्रामक तरीके से, लेकिन पूरे आत्मविश्वास के साथ जवाब दें।
अन्य देशों के मुकाबले भारत की स्थिति और तैयारियां बेहद मजबूत
प्रधानमंत्री ने देशवासियों और अपनी कैबिनेट को आश्वस्त किया है कि इस वैश्विक संकट से निपटने के लिए भारत की तैयारियां बहुत पुख्ता हैं। उन्होंने कहा कि यह एक ऐसी गंभीर स्थिति है जिसका असर सिर्फ किसी एक देश पर नहीं बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और सप्लाई चेन पर पड़ रहा है। हालांकि, हमारे पड़ोसी और दुनिया के कई अन्य देशों की तुलना में भारत इस संभावित संकट का सामना करने के लिए कहीं अधिक बेहतर और मजबूत स्थिति में है। इससे पहले बुधवार को भी तमिलनाडु में एनडीए की एक रैली को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कमर्शियल एलपीजी की कमी से प्रभावित होटल क्षेत्र का जिक्र करते हुए जनता से पैनिक न करने और केवल प्रमाणित जानकारी ही साझा करने की अपील की थी।
कूटनीतिक मोर्चे पर भारत की बड़ी जीत, होर्मुज से सुरक्षित निकले टैंकर
एक तरफ देश के अंदर गैस संकट को लेकर सरकार मुस्तैद है, तो दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर भारत को एक बहुत बड़ी कूटनीतिक कामयाबी हासिल हुई है। ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य के अहम समुद्री मार्ग से अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही रोकने और बाधित करने की कोशिशों के बीच विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अपने ईरानी समकक्ष अब्बास अराघची से उच्च स्तरीय वार्ता की। इस कूटनीतिक बातचीत का शानदार नतीजा निकला है और ईरान भारत के लिए इस रास्ते को खोलने पर राजी हो गया है। समझौते के तहत, ईरान अब भारतीय झंडे वाले टैंकरों को वहां से बिना किसी रोक-टोक के गुजरने देगा। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत के दो बड़े टैंकर ‘पुष्पक’ और ‘परिमल’ इस जलडमरूमध्य से सुरक्षित रूप से गुजर रहे हैं, जो भारत की ऊर्जा सप्लाई के लिए एक बहुत बड़ी राहत की खबर है।

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