भारतीय अर्थव्यवस्था और जॉब मार्केट के लिए एक राहत भरी खबर है। सांख्यिकी मंत्रालय की ओर से जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, देश में बेरोजगारी दर कम हुई है। अक्तूबर-दिसंबर 2025 की तिमाही में रोजगार के आंकड़ों ने सकारात्मक संकेत दिए हैं। इनके अनुसार ग्रामीण भारत और महिला कार्यबल की हिस्सेदारी में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। सरकार के आंकड़े बताते हैं कि श्रम बाजार अब सुधार की ओर बढ़ रहा है।
ग्रामीण भारत: ग्रामीण क्षेत्रों में सुधार की रफ्तार तेज रही है। यहां बेरोजगारी दर अक्तूबर-दिसंबर 2025 में घटकर चार प्रतिशत रह गई है। इससे पिछली तिमाही में यह आंकड़ा 4.4 प्रतिशत था। बेरोजगारी दर में गिरावट पुरुष और महिला दोनों वर्गों में रोजगार बढ़ने के कारण आई है।
शहरी भारत: शहरों में भी हालात सुधर रहा है। शहरी बेरोजगारी दर पिछली तिमाही के 6.9 प्रतिशत से घटकर 6.7 प्रतिशत हो गई है। इसमें मुख्य योगदान शहरी पुरुषों का रहा, जिनकी बेरोजगारी दर 6.2 प्रतिशत से गिरकर 5.9 प्रतिशत हो गई है।
महिलाओं की बढ़ी भागीदारी
इस रिपोर्ट का सबसे उत्साहजनक पहलू श्रम बल में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी है। श्रम बल सहभागिता दर (एलएफपीआर), जो यह बताती है कि आबादी का कितना हिस्सा काम कर रहा है या काम की तलाश में है, उसमें इजाफा हुआ है।
अक्तूबर-दिसंबर 2025 के दौरान समग्र एलएफपीआर बढ़कर 55.8 प्रतिशत हो गया, जो पिछली तिमाही में 55.1 प्रतिशत था। विशेष रूप से महिलाओं (15 वर्ष और उससे अधिक) के लिए यह दर 33.7 प्रतिशत से बढ़कर 34.9 प्रतिशत हो गई है। यह संकेत देता है कि महिलाएं अब बड़ी संख्या में श्रम बल का हिस्सा बन रही हैं।
खेती और स्वरोजगार का आसरा
आंकड़े बताते हैं कि रोजगार सृजन में अब भी पारंपरिक क्षेत्रों का दबदबा कायम है:
कृषि क्षेत्र: ग्रामीण रोजगार में कृषि क्षेत्र रीढ़ की हड्डी बना हुआ है। इस तिमाही में नियोजित लोगों में से 58.5 प्रतिशत कृषि से जुड़े थे, जो पिछली तिमाही के 57.7 प्रतिशत से अधिक है।
स्वरोजगार: नौकरी ढूंढने के बजाय लोग अपना काम शुरू करने को तरजीह दे रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार बढ़कर 63.2 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 39.7 प्रतिशत हो गया है।
क्या रोजगार के मार्चे पर हम सही दिशा में बढ़ रहे?
रोजगार का एक अन्य प्रमुख सूचक, श्रमिक जनसंख्या अनुपात (डब्ल्यूपीआर), जो जुलाई-सितंबर 2025 में 52.2 प्रतिशत था, वह बढ़कर 53.1 प्रतिशत हो गया है। बेरोजगारी दर में गिरावट और डब्ल्यूपीआर में वृद्धि यह बताती है कि अर्थव्यवस्था में रोजगार के अवसर पैदा हो रहे हैं। हालांकि, कृषि और स्वरोजगार पर बढ़ती निर्भरता यह भी बताती है कि संगठित क्षेत्र में अभी और अधिक अवसरों की जरूरत है।

