नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में पोंगल पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि पोंगल का त्योहार यह याद दिलाता है कि प्रकृति के प्रति आभार शब्दों तक सीमित रहने की जगह जीवन का जरूरी हिस्सा बनना चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि पोंगल आज एक वैश्विक त्योहार बन चुका है। पूरी दुनिया में तमिल समुदाय और तमिल संस्कृति से प्रेम करने वाले लोग इसे जश्न और उत्साह के साथ मनाते हैं। उसमें एक मैं भी हूं।
तमिल संस्कृति की तारीफ करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने आज बुधवार को कहा कि हमारा लक्ष्य ये होना चाहिए कि हमारी थाली भी भरी रहे, हमारी जेब भी भरी रहे और हमारी धरती भी सुरक्षित रहे। तमिल संस्कृति दुनिया की सबसे प्राचीन जीवित सभ्यताओं में से एक है। तमिल संस्कृति सदियों को जोड़ती है। उन्होंने कहा कि हमारी तमिल संस्कृति पूरे भारत की साझा विरासत है। इतना ही नहीं, पूरी मानवता की ये साझी विरासत है।
उन्होंने आगे कहा कि हमारे किसान राष्ट्र निर्माण के मजबूत साथी हैं। उनके प्रयासों से आत्मनिर्भर भारत अभियान को बहुत मजबूती मिल रही है। केंद्र सरकार भी किसानों को सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध होकर लगातार काम कर रही है।
पोंगल एक सुखद अनुभूति की तरह: PM मोदी
पोंगल की शुभकामनाएं देते हुए पीएम मोदी ने कहा, “आज पोंगल एक वैश्विक त्योहार बन चुका है। दुनियाभर में तमिल समुदाय और तमिल संस्कृति से प्रेम करने वाले लोग इसे उत्साह के साथ मनाते हैं। उसमें एक मैं भी हूं। इस खास पर्व को आप सभी के साथ मनाना मेरे लिए सौभाग्य की बात है। हमारे तमिल जीवन में पोंगल एक सुखद अनुभूति की तरह है। इसमें अन्नदाता की मेहनत धरती और सूर्य के प्रति आभार का भाव है। ये पर्व हमें प्रकृति परिवार और समाज में संतुलन बनाने का रास्ता दिखाता है।”
उन्होंने आगे कहा, “हमारे तमिल जीवन में पोंगल एक सुखद अनुभूति की तरह है। इसमें अन्नदाता की मेहनत, धरती और सूर्य के प्रति आभार का भाव है। साथ ही ये पर्व हमें प्रकृति, परिवार और समाज में संतुलन बनाने का रास्ता दिखाता है। अभी देश के अलग-अलग जगहों पर कहीं लोहड़ी, कहीं मकर संक्रांति तो कहीं माघ बिहू और अन्य त्योहारों के भी उमंग हैं। मैं भारत और दुनियाभर में रहने वाले सभी तमिल भाई-बहनों को पोंगल की और सभी पर्वों की बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं।”

