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7 Apr 2026, Tue

‘केवल संदेह पर कोई दोषी नहीं हो सकता…’ रेप केस में 11 साल काटी जेल, अब हाईकोर्ट से हुए बरी

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने एक फैसला सुनाते हुए दुष्कर्म और नाबालिग किशोरी की मौत के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे व्यक्ति को बरी कर दिया। आरोपी निर्मल कुमार ने 11 साल से ज्यादा जेल की सलाखों के पीछे बिताए थे। हालांकि, कोर्ट ने साफ कहा कि आपराधिक मामलों में केवल अनुमान या संदेह के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति बृजराज सिंह की खंडपीठ ने 20 सितंबर 2010 के उस मामले में 2018 के फैजाबाद सत्र न्यायालय के फैसले को पूरी तरह रद्द कर दिया।
20 सितंबर 2010 को फैजाबाद में पड़ोस में रहने वाले निर्मल कुमार पर नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार का आरोप लगा था। तीन दिन बाद पीड़िता की मौत हो गई। पीड़िता के पिता ने पड़ोसी निर्मल के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई। सत्र अदालत ने आरोपी को दुष्कर्म का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। निर्मल कुमार ने हाईकोर्ट में अपील दायर की, जिसमें आखिरकार उन्हें राहत मिल गई।
कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि फोरेंसिक रिपोर्ट में योनि स्वाब पर मानव वीर्य की मौजूदगी जरूर पाई गई थी, लेकिन यह साबित करने के लिए कोई और वैज्ञानिक जांच नहीं की गई कि वह वीर्य अपीलकर्ता निर्मल कुमार का ही था। खंडपीठ ने सख्त शब्दों में कहा कि डीएनए टेस्ट या वीर्य का मिलान न कर पाना जांच एजेंसी की गंभीर चूक थी। कोर्ट ने आगे कहा कि बिना ठोस सबूत के केवल संदेह के आधार पर किसी व्यक्ति को 11 साल तक जेल में बंद रखना न्यायोचित नहीं है। अपील स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट ने निर्मल कुमार की रिहाई का आदेश दे दिया।

By Aryavartkranti Bureau

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