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7 Jul 2026, Tue

लखनऊ में “आईवीएफ में जेनेटिक टेस्टिंग” विषय पर सीएमई कार्यक्रम आयोजित

  • सीड्स आईवीएफ एवं खुशी फॉउण्डेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुई सीएमई

लखनऊ। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र में लगातार हो रहे आधुनिक बदलावों और नई तकनीकों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से राजधानी लखनऊ के प्रतिष्ठित होटल क्लार्क अवध में “आईवीएफ में जेनेटिक टेस्टिंग के अनुप्रयोग” विषय पर एक विशेष सीएमई (Continuing Medical Education) कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में प्रदेशभर से आए वरिष्ठ चिकित्सकों, स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञों तथा स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े कई गणमान्य लोगों ने सहभागिता की।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि सीएमएस, लखनऊ किरण कुमारी दास रहीं। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि आज के समय में आधुनिक चिकित्सा तकनीकें स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी और सुरक्षित बना रही हैं। उन्होंने चिकित्सा विशेषज्ञों द्वारा किए जा रहे अनुसंधान एवं सेवाओं की सराहना करते हुए कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में तकनीक का समावेश भविष्य की बड़ी आवश्यकता है।

विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. सुधांशु दीक्षित उपस्थित रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि आईवीएफ उपचार में जेनेटिक टेस्टिंग की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। उन्होंने इस प्रकार के वैज्ञानिक आयोजनों को चिकित्सा जगत के लिए उपयोगी बताते हुए आयोजकों को बधाई दी।

कार्यक्रम में प्रसिद्ध आईवीएफ विशेषज्ञ डॉ. दिशा दत्ता चौधरी ने विषय पर विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि आईवीएफ एवं जेनेटिक टेस्टिंग जैसी अत्याधुनिक तकनीकों के माध्यम से निःसंतान दंपत्तियों को नई उम्मीद मिल रही है। इससे न केवल सफल गर्भधारण की संभावना बढ़ती है, बल्कि अनुवांशिक बीमारियों की रोकथाम में भी सहायता मिलती है। उन्होंने कहा कि जागरूकता और सही जानकारी के अभाव में कई लोग इन सुविधाओं का लाभ नहीं उठा पाते, इसलिए इस प्रकार के शैक्षणिक एवं वैज्ञानिक कार्यक्रम समाज के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।

वहीं इस दौरान सीड्स आईवीएफ से संतोष चौधरी ने कहा कि संस्थान का उद्देश्य केवल उपचार प्रदान करना नहीं, बल्कि लोगों को सही जानकारी और भावनात्मक सहयोग उपलब्ध कराना भी है। उन्होंने बताया कि सीड्स आईवीएफ आधुनिक तकनीकों एवं अनुभवी विशेषज्ञों की सहायता से मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए लगातार कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे सीएमई कार्यक्रम चिकित्सकों के ज्ञानवर्धन के साथ-साथ समाज में सकारात्मक स्वास्थ्य जागरूकता फैलाने का भी माध्यम बनते हैं।

इस अवसर पर चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों एवं चिकित्सकों ने सक्रिय सहभागिता की तथा विषय से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। वहीं विभिन्न चिकित्सा क्षेत्रों से डॉक्टर्स ने अपने विचार रखे।

कार्यक्रम में खुशी फॉउण्डेशन की ओर से सोशल मेडिकल ट्रेनर डॉ. विनीता  ने संस्था द्वारा चिकित्सा एवं जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में किए जा रहे सेवा कार्यों की विस्तृत जानकारी दी। इस दौरान डॉ. द्विवेदी ने बताया कि खुशी फॉउण्डेशन द्वारा देशभर में निरंतर सीपीआर (CPR), बेसिक लाइफ सपोर्ट (BLS), प्राथमिक उपचार (First Aid) सहित विभिन्न सामाजिक एवं स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इन अभियानों का उद्देश्य आम नागरिकों, युवाओं, विद्यार्थियों तथा विभिन्न संस्थानों के कर्मचारियों को आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित एवं प्रभावी जीवनरक्षक सहायता प्रदान करने के लिए प्रशिक्षित एवं सशक्त बनाना है।

उन्होंने कहा कि फॉउण्डेशन स्वास्थ्य, शिक्षा एवं सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में जनसेवा के उद्देश्य से निरंतर कार्य कर रहा है तथा समाज में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने के लिए नियमित प्रशिक्षण, जागरूकता अभियान और जनहित कार्यक्रम संचालित कर रहा है। डॉ. विनीता इन प्रशिक्षण अभियानों का नेतृत्व करते हुए जन-जागरूकता को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

कार्यक्रम का आयोजन सीड्स आईवीएफ एवं खुशी फॉउण्डेशन के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। आयोजन को सफल बनाने में खुशी फॉउण्डेशन की सचिव ऋचा द्विवेदी का विशेष योगदान रहा। उन्होंने  सभी अतिथियों, चिकित्सकों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भविष्य में भी स्वास्थ्य जागरूकता से जुड़े ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे।

कार्यक्रम के दौरान स्वास्थ्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले कई चिकित्सकों एवं विशेषज्ञों को सम्मानित भी किया गया। अतिथियों ने सम्मानित चिकित्सकों के कार्यों की सराहना करते हुए उन्हें समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताया।

इस दौरान स्वास्थ्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले चिकित्सकों का सम्मान भी किया गया। कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों को कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया गया तथा स्वास्थ्य सेवाओं में आधुनिक तकनीकों के अधिकाधिक उपयोग को बढ़ावा देने का संकल्प लिया गया।