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22 Aug 2026, Sat

चीनी कम, इथेनॉल ज्यादा खड़गे ने पूछा- ये ‘आत्मनिर्भर भारत’ का कौन सा गणित है, मोदी सरकार जवाब दे

नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 22 अगस्त को चीनी की बढ़ती कीमतों और घटते स्टॉक को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने ‘आत्मनिर्भर भारत’ की नीति पर सवाल उठाते हुए त्योहारों से पहले चीनी की कीमतों में हुई बढ़ोतरी को लेकर मोदी सरकार से जवाब मांगा।
खड़गे ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि त्योहारों से पहले सरकार की नीतियों की कड़वाहट चीनी की मिठास पर भारी पड़ रही है। उन्होंने पूछा कि दुनिया के प्रमुख चीनी उत्पादक और निर्यातक देशों में शामिल भारत में चीनी का स्टॉक पिछले नौ वर्षों के सबसे निचले स्तर पर क्यों पहुंच गया।
खड़गे ने चीनी निर्यात पर रोक और 10 लाख टन चीनी के शुल्क-मुक्त आयात के फैसले पर भी सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि अगर भारत चीनी का बड़ा उत्पादक और निर्यातक है, तो आयात की जरूरत क्यों पड़ी। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि पिछले तीन महीनों में चीनी की कीमतों में करीब 40 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। त्योहारों से ठीक पहले कीमतों में इस उछाल का सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है।
सरकार ने आरोपों को किया खारिज
उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने 21 अगस्त को खड़गे के आरोपों पर सफाई दी। मंत्रालय ने कहा कि चीनी की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी को इथेनॉल के लिए चीनी के डायवर्जन से जोड़ना गलत है।
सरकार के मुताबिक, इथेनॉल उत्पादन के लिए इस्तेमाल होने वाली चीनी की हिस्सेदारी 2022-23 में करीब 12 फीसदी थी, जो 2025-26 में घटकर लगभग 9 फीसदी रह गई है।
मक्के से हो रहा इथेनॉल का बड़ा उत्पादन
मंत्रालय ने बताया कि अब इथेनॉल का करीब तीन-चौथाई उत्पादन अनाज से होता है, जिसमें मक्का प्रमुख है। सरकार का कहना है कि चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे कई अन्य कारण हैं।
इनमें उम्मीद से कम घरेलू चीनी उत्पादन, त्योहारों से पहले बढ़ी मांग, गन्ने की फसल में रेड रॉट और टॉप बोरर जैसी बीमारियों का असर और अत्यधिक बारिश के कारण खेतों में जलभराव शामिल हैं।

By Aryavartkranti Bureau

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