अब गाजा के बच्चों पर कुपोषण की मार, तीन हजार से ज्यादा अस्पताल में भर्ती, नहीं मिल पा रहा खाना

यरुशलम, एजेंसी। पहले से ही इस्राइल के हमले झेल रही गाजा की जनता अब एक नई समस्या से जूझ रही है। दरअसल गाजा में रह रहे लोगों में कुपोषण की समस्या बढ़ रही है। खासकर बच्चे कुपोषण से पीड़ित हैं और मार्च महीने में ही तीन हजार से ज्यादा बच्चे कुपोषण के चलते अस्पतालों में भर्ती हुए हैं। गौरतलब है कि हमास के साथ युद्धविराम समझौता टूटने के बाद इस्राइल ने गाजा में मानवीय मदद रोक दी है।
संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी ने जारी किए आंकड़े
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, फरवरी में 2027 बच्चे कुपोषण के चलते अस्पताल में भर्ती हुए थे। संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मदद मामलों की एजेंसी (ओसीएचए) ने ये आंकड़े जारी किए हैं। एजेंसी ने बताया कि गाजा में खाने-पीने की चीजों की भारी कमी है। इस्राइल द्वारा मानवीय मदद और अन्य जरूरी सामान पर प्रतिबंध के फैसले को सात हफ्ते बीत चुके हैं। इसके चलते मांस, पोल्ट्री, अंडे, डेयरी, सब्जी और फल आदि की भारी कमी हो गई है। एजेंसी ने बताया कि गाजा में पीने के पानी की भी समस्या गंभीर है और इसका असर लोगों की सेहत पर पड़ रहा है।
हमास की कैद में बंधक लोगों को छुड़ाने के लिए नियुक्त किए गए ट्रंप प्रशासन के विशेष दूत एडम बोएलर ने कहा है कि बंधकों की रिहाई के बगैर युद्धविराम समझौते पर बात आगे नहीं बढ़ेगी। गौरतलब है कि हमास के साथ युद्धविराम समझौता टूटने के बाद से इस्राइल ने गाजा में हमले तेज किए हैं। बुधवार को इस्राइली हमले में गाजा में 35 लोगों की मौत हुई। संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि इस्राइल के ताजा हमलों के चलते गाजा में पांच लाख लोगों का विस्थापन हुआ है।
इस्राइल ने कहा- बंधकों की रिहाई तक जारी रहेंगे हमले
इस्राइली रक्षा मंत्री काट्ज ने साफ कहा है कि उनके देश की नीति साफ है कि वे हमास पर दबाव बनाने के लिए ये हमले कर रहे हैं और जब तक हमास बाकी बचे बंधकों को रिहा नहीं करता है, तब तक हमास पर हमले जारी रहेंगे। गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय का दावा है कि इस्राली हमलों में गाजा में अब तक कुल 51 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हुई हैं और एक लाख से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। हालांकि गाजा की सरकार का दावा है कि मृतकों का आंकड़ा 61 हजार से भी ज्यादा है।

Aryavartkranti Bureau
Aryavartkranti Bureauhttp://www.aryavartkranti.com
आर्यावर्तक्रांति दैनिक हिंदी समाचार निष्पक्ष पत्रकारिता, सामाजिक सेवा, शिक्षा और कल्याण के माध्यम से सामाजिक बदलाव लाने की प्रेरणा और सकारात्मकता का प्रतीक हैं।
अन्य ख़बर

Most Popular